टिप्पणीः तीन दृष्टिकोणों से चीन को देखें

2018-12-17 19:30:00

टिप्पणीः तीन दृष्टिकोणों से चीन को देखें

इस साल चीन में सुधार व खुलेपन की नीति लागू होने की 40वीं वर्षगांठ है। आजकल पश्चिमी देशों में ये आवाज़ सुनायी देती रही है कि चीन का भविष्य कैसा होगा? क्या चीन साझेदार है या प्रतिद्वंदी? इसी पृष्ठभूमि में 16 दिसम्बर को पेइचिंग में उद्घाटित चीन को देखें तीसरे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का खास अर्थ है।

चीन के प्रति विश्व की समझ बढ़ाने और देश-विदेश के आदान प्रदान व सहयोग को आगे बढ़ाने का अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन होने के नाते चीन को देखें अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन 2013 और 2015 में पेइचिंग में दोबारा आयोजित हुए थे। इस बार के सम्मेलन में करीब 600 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने सम्मेलन को बधाई पत्र भी भेजा।

चीन के बारे में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय विशेषकर पश्चिमी देशों के तीन प्रमुख सवाल हैं। यानी चीन कैसा देश है? चीन कहां से आया है? चीन किस तरफ़ जाएगा? इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने वाले देश विदेश के प्रतिनिधियों ने चीन के सुधार व खुलेपन के इतिहास और भविष्य के दृष्टिकोण से जवाब दिया।

पहले सवाल के बारे में चीनी सीपीसी केंद्रीय पोलित ब्यूरो के सदस्य यांग च्येछी ने उद्घाटन समारोह में कहा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय चीन के शांतिपूर्ण विकास, सहयोग व साझी जीत को आगे बढ़ाने और मतभेदों को दूर रखकर समानता की खोज करने से चीन को जान सकता है। चीनी राज्य परिषद के प्रेस दफ्तर के प्रधान श्वू लिन ने कहा कि हमें ऐतिहासिक और यथार्थ दृष्टिकोण से यह देखना चाहिए कि हालिया चीन की सबसे स्पष्ट विशेषता सुधार व खुलापन ही है। यह आधुनिक चीन के भाग्य का निर्णय करने वाली अहम बात है।

दूसरे सवाल के जवाब में चीनी राष्ट्रीय नवाचार और विकास रणनीतिक की अनुसंधान संस्था के अध्यक्ष जन बीच्येन ने कहा कि पिछले 40 सालों के विकास से यह जाहिर है कि चीन को सुधार व खुलेपन की नीति लागू करते रहनी चाहिए। यह नये सामाजिक प्रमुख अंतर्विरोध के आधार पर किया जाने वाला सुधार होगा।

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