टिप्पणीः अमेरिका के तिब्बत एक्ट का क्या मकसद है?

2018-12-22 16:00:00

टिप्पणीः अमेरिका के तिब्बत एक्ट का क्या मकसद है?

अमेरिकी ह्वाइट हाउस ने हाल में अमेरिकी कांग्रेस में पारित तथाकथित वर्ष 2018 तिब्बत में रेसिप्रोकल ऐक्सेस एक्ट की पुष्टि की, जिससे यह औपचारिक रूप से अमेरिका का कानून बन चुका है। वर्ष 2018 तिब्बत में रेसिप्रोकल ऐक्सेस क्ट चीन के अंदरुनी मामलों में हस्तक्षेप करने की कार्यवाई है, साथ ही अमेरिकी कांग्रेस द्वारा तथ्यों को नजरअंदाज कर चीन के विकास से रोकने की और एक हरकत है।

तथाकथित तिब्बत क्ट के मुताबिक चीन सरकार को अमेरिकी पत्रकारों, राजनयिकों और पर्यटकों को स्वतत्र रूप से चीन के तिब्बती क्षेत्रों का दौरा करने को अनुमति देनी चाहिए। जो चीनी अधिकारी अमेरिकियों को तिब्बत में प्रवेश करने की मंजूरी नहीं देते हैं, उन्हें अमेरिका जाने की मनाही होगी। देखने में यह कानून अमेरिकियों के और स्वतंत्र रूप से चीन के तिब्बत जाने की कोशिश करता है, वास्तव में यह अमेरिकी प्राथमिकता देने वाला कानून है। अमेरिकी सांसदों के मन में विश्व में कोई भी एक जगह अमेरिकियों के आने जाने से नहीं रोक सकती है। अमेरिकी जहां जाना चाहते हैं, वहां जा सकते हैं। लेकिन यह दुनिया अमेरिका खुद की नहीं है। किसी भी एक देश अपने देश के नियमों का सम्मान न करने वाले लोगों का स्वागत करता है।

प्राचीन काल से तिब्बत चीन की प्रादेशिक भूमि का एक अखंडनीय भाग है। अमेरिका चीन के अंदरूनी मामले में बेहूदगी से हस्तक्षेप करता है और तथाकथित तिब्बती स्वतंत्रता की शक्ति को गंभीरता के साथ गलत संकेत देता है।

वास्तव में चीन ने चीन और चीन के तिब्बत को पसंद करने वाले अमेरिकियों की तिब्बती यात्रा पर कभी कोई पाबंदी नहीं लगायी ।चीन का तिब्बत और अन्य चार प्रांतों के तिब्बती क्षेत्र विदेशियों के लिए खुले हैं। वर्ष 2015 से अब तक लगभग 40 हज़ार अमेरिकियों ने तिब्बत की यात्रा की है। अमेरिकी कांग्रेस के अनेक सांसदों ने भी तिब्बत का दौरा किया था। कई अमेरिकी अनेक बार तिब्बत की यात्रा कर चुके हैं।

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