चीन-अमेरिका संबंधों में सहयोग ही एकमात्र सही विकल्प : चीनी राजदूत

2019-01-02 17:01:07

1 जनवरी को एक स्थानीय अखबार में अमेरिका स्थित चीनी राजदूत त्स्वे थिएन काई का एक लेख प्रकाशित हुआ, जिसमें लिखा है कि चीन और अमेरिका के बीच समान हित उनके बीच मतभेदों से कहीं ज्यादा हैं। उनके लिए सहयोग करना एकमात्र ही सही विकल्प है।

चीनी राजदूत ने अपने लेख में यह भी लिखा है कि द्विपक्षीय संबंधों को बनाये रखने का राजनीतिक आधार नहीं बदलना चाहिये। चीन और अमेरिका को एक दूसरे के केंद्रीय हितों और चिन्ताओं का समादर करना चाहिये, और चीन-अमेरिका संबंधों की स्थापना के समय प्रकाशित तीन विज्ञप्तियों का कड़ाई से पालन करना चाहिये। इसमें खास बात है कि एक चीन का सिद्धांत नहीं बदला जाएगा।

उनके लेख में यह भी लिखा है कि पिछले चालीस साल पहले चीन और अमेरिका के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना हुई और उस दौरान चीन में रुपांतर और खुलेपन का अध्याय भी जोड़ा गया। वर्तमान में चीन और अमेरिका के बीच प्रति दिन की व्यापार रकम 1.5 अमेरिकी डालर तक जा पहुंची है। वर्ष 2015 के आंकड़े बताते हैं कि चीन को निर्यात करने से अमेरिका में 9.1 लाख रोजगार के मौके तैयार हुए। दोनों देशों के बीच प्रति दिन एक दूसरे के यहां काम करने, अध्ययन करने और पर्यटन करने वालों की संख्या दस हजार तक रही है। बहुत से परिवारों और व्यक्तियों का भाग्य भी इससे बदला है। बीते चालीस सालों में संबंधों के विकास से चीन और अमेरिका दोनों को उभय जीत संपन्न की गयी और साथ ही विश्व शांति व विकास के लिए उत्तम शर्तें तैयार की गयी हैं।

लेख में यह लिखा है कि बीते चालीस सालों में चीन और अमेरिका की अर्थव्यवस्था, समाज, प्रौद्योगिकी और सैन्य स्थितियों में परिवर्तन आया है। दोनों के बीच स्वाभाविक तौर पर कुछ न कुछ मतभेद उभरने लगे हैं और इनका एक ही क्षण में समाधान असंभव है। पर इन मतभेदों को नियंत्रण में रखा जा सकता है। क्योंकि दोनों देशों के बीच संबंधों को बनाये रखने वाले तत्व वहीं मौजूद हैं। दोनों देशों की जनता को सुखमय जीवन चाहिये, दोनों को वैश्विक चुनौतियों का समाधान करना होगा। हमें दोनों देशों की जनता के मूल हितों के आधार पर भविष्य उन्मुख संबंधों का विकास करना चाहिये। नयी स्थितियों में चीन-अमेरिका संबंध एक बार फिर ऐतिहासिक चौराहे पर आ खड़े हुए हैं। विश्वास है कि दोनों देशों की जनता के समान हित दोनों देशों के बीच मतभेदों से ज्यादा हावी रहेंगे। भावी चालीस सालों के चीन-अमेरिका संबंधों को जनता के द्वारा परिभाषित किया जाना चाहिये।

लेख में यह भी लिखा है कि हमें दोनों देशों के राष्ट्रपतियों की सहमतियों के आधार पर समन्वय, सहयोग और स्थिरता से द्विपक्षीय संबंधों के विकास को आगे बढ़ाना चाहिये। हमें संपर्क रखने और सहयोग करने के जरिये आर्थिक व व्यापारिक मतभेदों को हल करना चाहिये। चीन-अमेरिका संबंधों की इमारत समान हितों के आधार पर खड़ी है। इसकी नींव बदलने से दोनों पक्षों को हानि पहुंचेगी। अपनी संतान के लिए एक सुस्थिर चीन-अमेरिका संबंध बचाना हमारा समान ऐतिहासिक कर्तव्य है।

( हूमिन )

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