टिप्पणीः "ताइवान के देशबंधुओं को सूचना पत्र" की 40वीं वर्षगांठ पर शी का बयान चीन के शांतिपूर्ण एकता का नया नीतिगत कार्यक्रम

2019-01-04 11:31:12

हाल में "ताइवान के देशबंधुओं को सूचना पत्र" की 40वीं वर्षगांठ पर एक बैठक चीन की राजधानी पेइचिंग में बुलायी गयी। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने ताइवान जलडमरुमध्य के दोनों तटों के संबंधों पर अहम बयान दिया। उन्होंने जोर दिया कि चीन में एकीकरण को साकार करना चीनी कम्युनिस्ट पार्टी, चीन सरकार और चीनी जनता का ऐतिहासिक मिशन है, जो कभी नहीं हिलता है। चीनी राष्ट्र के महान पुनरुत्थान को साकार करने की प्रक्रिया में चीन का पुनरेकीकरण करना चाहिए।

विश्लेषकों का मानना है कि शी चिनफिंग ने बयान में ताइवान जलडमरुमध्य के दोनों तटों के लोगों से पाँच सूत्रीय सुझाव पेश किए गए कि वे हाथ मिलाकर जातीय पुनरुत्थान को आगे बढ़ाएं, नये दो तंत्र वाले ताइवान प्रस्ताव की खोज करें, एक चीन के सिद्धांत पर कायम रहकर द्विपक्षीय संबंधों के मेल विकास को गहरा करें और क्रॉस-स्ट्रीट देशबंधु एक दूसरे को परिजनों के जैसे देखें।

शी के पाँच सूत्रीय सुझाव ने न सिर्फ चीन के शांतिपूर्ण पुनरेकीकरण के लक्ष्य को दिखाया है, साथ ही चीन की केंद्र सरकार द्वारा ताइवान के विभिन्न तबकों के साथ समान सलाह मशविरे के जरिए एक देश दो तंत्र के ताइवान प्रस्ताव पर चर्चा करने की इच्छा प्रतिबिंबित है। साथ ही शी ने ताइवान अलगाववादियों को गंभीर चेतावनी भी दी। ताइवान समस्या जाति की कमजोरी से पैदा हुई थी और अवश्य ही जाति के पुनरुत्थान से समाप्त की जाएगी। शी चिनफिंग के इस वाक्य को कई चीनियों की सक्रिय प्रतिक्रिया मिली है। 1840 अफ़ीम युद्ध के बाद ताइवान जापान के कब्जे में आधी सदी के लिए रहा। इस के बाद चीन के गृहयुद्ध और बाहरी शक्ति के हस्तक्षेप से ताइवान जलडमरुमध्य के दोनों तटों ने लम्बे अरसे से राजनीतिक सामना किया। लेकिन चीन के हजारों साल के लम्बे इतिहास में ये 100 से अधिक साल की कमजोरी सिर्फ इतिहास की एक झलक थी। चीनी राष्ट्र हमेशा के लिए देश के पुनरुत्थान के लिए संघर्ष करता रहा है।

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