टिप्पणी:ब्रिटिश ब्रेक्सिट का रास्ता कहां है

2019-01-16 18:31:00

ब्रिटिश संसद की निचली सदन ने 15 जनवरी को मतदान से सरकार और यूरोपीय संघ के बीच संपन्न ब्रेक्सिट समझौता भारी मत से ठुकरा दिया। जिससे ब्रिटेश का ब्रेक्सिट का रास्ता फिर अनश्चित हो गया है।

स्थानीय विश्लेषकों के विचार में ब्रिटिश ब्रेक्सिट की उधेड़-बुन का मूल कारण यही है कि विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच, अभिजात्य वर्ग और आम आदमियों के बीच राजनीतिक समानता नहीं बनायी जा सकती। ब्रिटेन के भावी रास्ते पर विभिन्न पक्ष सिर्फ़ असंतोष व्यक्त करते हैं, लेकिन उनके पास विवेकपूर्ण रोडमैप नहीं है। जैसे टेरेसा मे ने मतदान के बाद कहा कि निचली सदन ने अपनी राय व्यक्त की है। यह स्पष्ट है कि निचली सदन ब्रेक्सिट समझौते का समर्थन नहीं करती। लेकिन मतदान से हमें यह नहीं पता चला कि उन्हें क्या चाहिए ।

वर्तमान में ब्रिटिश राजनीतिक एलीटों को सिर्फ़ पता है कि वे क्या नहीं चाहते हैं, लेकिन पता नहीं है कि उनको क्या चाहिए और कैसे प्राप्त किया जाए। लगता है कि दूसरे ऱेफरेंडम का आयोजन एक रास्ता है। लेकिन अगर ऐसा हुआ, इसकी भारी राजनीतिक कीमत होगी । इससे ब्रिटिश लोकतांत्रिक राजनीति की साख को भारी नुकसान पहुंचेगा और मुठभेड़ भी पैदा होने की संभावना होगी।

उधर समझौते रहित ब्रेक्सिट की संभावना भी बढ़ रही है। यूरोपीय संघ आयोग के अध्यक्ष जीन क्लाउड जुनकर ने एक बयान में साफ़ कहा कि मतदान के परिणाम से समझौते रहित ब्रेक्सिट का खतरा बढ़ रहा है । यूरोपीय संघ को इस के निपटारे के लिए तैयार करना चाहिए।

कई अंतरराष्ट्रीय मामले जानकारों की नज़र में ब्रेक्सिट वास्तव में एक बड़ी गलती है। इससे ब्रिटिश आर्थिक भविष्य अधिक अनिश्चित होगा और विश्व वित्तीय केंद्र के रूप में लंदन का स्थान भी कमज़ोर होगा।

क्या ब्रेक्सिट एक भारी गलती है या एक अभूतपूर्ण मौका है। ब्रिटिश राजनीतिज्ञों को अब इस सवाल का जिम्मेदाराना जवाब देना होगा।

(वेइतुंग)

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