एशिया के रासायनिक उद्योग बाज़ार में तेज़ वृद्धि होगी, चीन और भारत अहम प्रेरक शक्ति

2019-02-01 16:31:00

इंफ़ोर्मेशन हैंडलिंग सर्विस यानी आईएचएस मार्किट ने हाल में अनुमान लगाया कि साल 2019 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर 2018 की 3.2 प्रतिशत से 3.0 प्रतिशत तक कम होगी और भविष्य के कुछ सालों में लगातार कम होगी। वैश्विक व्यापारिक मात्रा में वृद्धि की गति साल 2018 के शुरु से अंत तक 5 प्रतिशत से शून्य तक कम हुई। साल 2019 में व्यापारिक मात्रा में बड़ी गिरावट दर्ज की जाएगी, जिससे वैश्विक अर्थतंत्र पर ही नहीं, बल्कि एशियाई रासायनिक उद्योग की वृद्धि पर भी प्रभाव पड़ेगा। लेकिन साल 2018 के अंत में मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में आयोजित एशिया पेट्रो रसायन उद्योग सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों ने एशिया में रासायनिक उद्योग की मांग में आने वाली वृद्धि पर आशा जताई। उनकी नज़र में चीन और भारत में रासायनिक वस्तुओं की मांग में तेज इजाफा होगा। एशिया में मध्यम आय वाली जनसंख्या लगातार बढ़ेगी, इससे रासायनिक उद्योग का तेज़ विकास आगे बढ़ेगा।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ़ के अनुमान के अनुसार, साल 2018 में भारतीय आर्थिक वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत थी, और 2019 में 7.8 प्रतिशत होगी। इंडियन केमिकल एंड पेट्रोकेमिकल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कमल नानावती ने कहा कि भविष्य के कुछ सालों में भारतीय अर्थतंत्र की तेज़ वृद्धि बनी रहेगी, जिससे भारत में पेट्रो और रसायन उद्योग को ज्यादा मौका मिलेगा। ऐसी पृष्ठभूमि में वास्तु निर्माण और कृषि क्षेत्र में रासायनिक वस्तुओं की मांग बढ़ेगी। वहीं भारतीय रसायन और उर्वरक मंत्रालय के अधीन रसायन और पेट्रो रसायन विभाग के महासचिव राघवेंद्र राव ने हाल में कहा कि आने वाले 10 सालों में भारत में पेट्रो रसायन उत्पादों की मांग दो गुना होगी, जो प्रति साल 4 करोड़ टन होगी। रासायनिक वस्तुओं के अभाव वाले मुद्दे के समाधान के लिए भारत ने प्रति साल 2.5 करोड़ टन रासायनिक वस्तुओं का उत्पादन बढ़ाने की योजना बनाई है।

(श्याओ थांग

न्यूज़ व्यापार पर्यटन बाल-महिला स्पेशल विश्व का आईना चीनी भाषा सीखें वीडियो फोटो गैलरी