चीन-अमेरिका संबंध में सहयोग व आपसी लाभ की प्रवृत्ति कभी नहीं बदलेगी

2019-02-10 15:31:00

अमेरिका स्थित चीनी राजदूत छ्वेई थ्येनखाई ने हाल में कहा कि चीन और अमेरिका के बीच मतभेद होना सामान्य बात है। महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों पक्षों को आपसी समझ प्रगाढ़ करके एक दूसरे के सामरिक लक्ष्य को सही ढंग से समझना चाहिए। चीन-अमेरिका संबंध में सहयोग, आपसी लाभ और साझी जीत की प्रवृत्ति कभी नहीं बदलती है।

8 फरवरी को छ्वेई थ्येनखाई ने मिशिगन स्टेट में चीन-अमेरिका राजनयिक संबंधों की 40वीं वर्षगांठ की एक संगोष्ठी में भाग लेते समय ये बात कही। उन्होंने कहा कि चीन और अमेरिका के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के दौरान चीन में सुधार व खुलेपन की नीति लागू हुई। यह आकस्मिक घटना नहीं है। इन दो घटनाओं ने चीन और अमेरिका की जनता और विश्व की जनता को भारी लाभ पहुंचाया है। हालांकि इतिहास, संस्कृति, सामाजिक प्रणाली आदि क्षेत्रों में चीन और अमेरिका के बीच भारी भिन्नताएं हैं, फिर भी पिछले 40 सालों में द्विपक्षीय संबंधों की प्रमुख धारा सहयोग, आपसी लाभ और साझी जीत ही है। पिछले 40 सालों में चीन और अमेरिका में भारी परिवर्तन आया है, फिर भी दोनों देशों के संबंधों की प्रमुख प्रवृत्ति कभी नहीं बदलती है।

छ्वेई थ्येनखाई ने कहा कि अब कुछ लोगों ने चीन-अमेरिका प्रतिस्पर्द्धा का ढिंढोरा पीटा है, जिससे दोनों देश चिंतित हैं। चीन और अमेरिका के बीच मतभेद होना सामान्य बात है। अहम बात यह है कि दोनों पक्षों को आपसी समझ व सम्मान को प्रगाढ़ करना चाहिए।

छ्वेई थ्येनखाई ने कहा कि प्रतिस्पर्द्धा एक बूरा शब्द नहीं है। देशों के संबंधों में प्रतिस्पर्द्धा का भी सामान्य अस्तित्व होता रहा है। लेकिन आज कुछ लोग प्रतिस्पर्द्धा को शून्य योग खेल समझते हैं। इस सोच ने चीन-अमेरिका संबंध को भारी नुकसान पहुंचाया है। हाल में विश्व के विभिन्न देश आतंकवाद, गरीबी, मौसम परिवर्तन, प्राकृतिक आपदा, सीमा-पार अपराध आदि अनेक समान चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इसलिए चीन और अमेरिका को हाथ मिलाकर सहयोग को मजबूत करके चुनौतियों का सामना करना चाहिए।

साथ ही छ्वेई ने कहा कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान खास तौर पर शैक्षिक सहयोग चीन-अमेरिका संबंध का अहम स्तंभ है। छात्र दोनों देशों के संपर्क को मजबूत करने का अहम पुल है, जो दोनों देशों की जनता की आपसी समझ को प्रगाढ़ करने में मददगार सिद्ध होगा। चीन और अमेरिका को सांस्कृतिक आदान-प्रदान का और बड़ा समर्थन व प्रोत्साहन देना चाहिए।

उस दिन अमेरिकी भूतपूर्व विदेश मंत्री बर्न्स और अमेरिकी राजनीतिक व व्यापारिक जगत के करीब 500 लोगों ने संगोष्ठी में हिस्सा लिया।

(श्याओयांग)

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