ब्रिटेन को चागोस द्वीप समूह पर कब्ज़ा छोड़ना चाहिये : इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस

2019-02-26 15:31:00

हिंद महासागर में स्थित चागोस द्वीप समूह पर ब्रिटेन की प्रभुता अवैध है। ब्रिटेन को इस द्वीप समूह से अपना नियंत्रण जल्द हटाना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष अदालत यानी नीदरलैंड के “द हेग इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस” ने 25 फरवरी को यह बात कही।चागोस द्वीप समूह के स्वामित्व मुद्दे पर इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने जानकारीपूर्ण राय प्रकट किया। यह राय ब्रिटिश कूटनीति की असफलता का प्रतीक है। साथ ही यह बात ब्रिटेन की अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठा पर नकारात्मक प्रभाव डालेगी।

चागोस द्वीप समूह उत्तर-पूर्वी मॉरीशस से 750 किलोमीटर दूर है। मॉरीशस को 1968 में ब्रिटेन से आजादी मिली थी, लेकिन उससे पहले ही 1965 में ब्रिटेन ने मॉरीशस से चागोस द्वीप समूह को अलग कर दिया था। इसके बाद ब्रिटेन ने चागोस द्वीप समूह पर कब्ज़ा किया और इस द्वीप समूह पर सभी आदिवासियों और निवासियों को छोड़ा गया था। साथ ही ब्रिटेन ने अमेरिका को इस द्वीप समूह में से सबसे बड़ा द्वीप डिएगो गार्सिया द्वीप पर सैन्य अड्डे की स्थापना का आमंत्रण दिया।

वर्तमान में ब्रिटिश सरकार कहती है कि चागोस द्वीप समूह हिंद महासागर में स्थिति ब्रिटेन की प्रादेशिक भूमि है। पिछले वर्ष मॉरीशस ने बताया कि विवश होकर उन्होंने अपनी प्रादेशिक भूमि यानी चागोस द्वीप समूह छोड़ा। इस बात ने यूएन के 1514वें संकल्प का उल्लंघन किया है। इस संकल्प के अनुसार स्वतंत्र होने के पहले अपनिवेश टूटने पर पाबंदी है।

इसके पहले अंतर्राष्ट्रीय समुदाय विशेषकर अफ्रीकी देशों ने ब्रिटेन को चागोस द्वीप समूह पर कब्ज़ा छोड़ने का दावा किया। उन्हें लगता है कि चागोस द्वीप समूह की प्रभुता वापस लेने से पहले अफ्रीका पूर्ण स्वतंत्रता पूरी नहीं करेगा।(हैया)

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