टिप्पणीः अरब लीग और यूरोपीय संघ को सहयोग मजबूत करना चाहिए

2019-02-26 19:01:00

पहला अरब लीग-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन 25 फरवरी को मिस्र के शर्म अल शेख में संपन्न हुआ। मिस्र के राष्ट्रपति, सऊदी अरब के शाह, जर्मन चांसलर, ब्रिटिश प्रधानमंत्री, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष, यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष समेत अरब और यूरोपीय देशों के 50 से अधिक नेताओं ने वर्तमान शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया। इस शिखर सम्मेलन में प्राप्त उपलब्धियों से देखा जाए तो यूरोपीय संघ और अरब लीग दो क्षेत्रीय संगठनों की सहमतियां मतभेदों से ज्यादा हैं। जिससे जाहिर है कि दोनों पक्ष सिर्फ बहुपक्षीय सहयोग प्रणाली को मजबूत करते हुए एक साथ चुनौतियों का सामना कर सकेंगे।

प्रथम शिखर सम्मेलन की समाप्ति के बाद जारी शर्म अल शेख घोषणा पत्र के मुताबिक दोनों के सहयोग की उपलब्धि अनुमान से अच्छी रही और सहमति मतभेद से बड़ी है। विभिन्न पक्षों ने यह मंजूरी दी कि वे 2015 के नवम्बर माह के वालेता शरणार्थी शिखर सम्मेलन में संपन्न कार्यवाही योजना के मुताबिक कानूनी प्रवासी का प्रोत्साहन करेंगे, शरणार्थियों के हितों की रक्षा करेंगे, मानव तस्करी पर हमला करेंगे और शरणार्थियों का सही ढंग से प्रबंध सुनिश्चित करेंगे।

वर्तमान शिखर सम्मेलन में फिलिस्तीन-इजराइल, सीरिया और लीबिया आदि गर्म मुद्दों पर अरब लीग को यूरोपीय देशों का समर्थन प्राप्त है। खास तौर पर यूरोपीय संघ ने येलुशलम के स्थान की रक्षा करने पर मंजूरी दी और दोहराया कि वह संयुक्त राष्ट्र संघ के संबंधित प्रस्ताव के मुताबिक दो देशों के प्रस्ताव से फिलिस्तीनी समस्या के हल को आगे बढ़ाया जाएगा। यूरोपीय संघ का यह रुख निसंदेह अरब देशों को निश्चिंत रहने देता है।

यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष जीन क्लाउद जुन्कर ने शिखर सम्मेलन में कहा कि अरब और यूरोपीय लोगों का समान इतिहास है। आशा है कि वे हाथ मिलकर उन के भविष्य का सहनिर्माण करेंगे। भविष्य का विकास बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने और क्षेत्रीय व विश्व व्यवस्था की समान रक्षा करने पर निर्भर करेगा। एक दूसरे का सम्मान कर मतभेदों को किनारे रखकर समानताओं की खोज करने से ही क्षेत्रीय व वैश्विक सुरक्षा व विकास को निरंतर आगे विकसित किया जा सकेगा।

(श्याओयांग)

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