टिप्पणी :अमेरिका और डीपीआरके के बीच शिखर भेंटवार्ता सार्थक होने के साथ कुछ दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर नहीं हुए

2019-03-01 15:31:00

विश्व के बड़े ध्यान में अमेरिका और डीपीआरके के नेताओं ने वियतनाम के हनोई में दूसरी भेंटवार्ता का आयोजन किया। लेकिन खेद है कि इस बार की भेंटवार्ता में कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर नहीं हुए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि इस बार की दो दिवसीय भेंटवार्ता सार्थक है, लेकिन किसी भी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर नहीं हुए।

अमेरिका के अनुसार इस बार की भेंटवार्ता में दोनों पक्षों द्वारा डीपीआरके पर लगाए गए प्रतिबंध को दूर करने पर मतभेद हुए, लेकिन वार्ता टूटी नहीं।

डीपीआरके के विदेश मंत्री री योंग-हो ने 1 मार्च को तड़के हनोई में कहा कि भेंटवार्ता में डीपीआरके ने सिर्फ कुछ प्रतिबंधों को हटाने की मांग की। अगर अमेरिका इससे सहमत है, तो डीपीआरके योंगब्योन परमाणु सामग्री उत्पादन संस्थापनों को स्थायी रूप से त्याग देगा। री योंग-हो ने कहा कि भेंटवार्ता में अमेरिका ने हमेशा से डीपीआरके से योंगब्योन परमाणु संस्थापन के अलावा एक और कदम उठाने की मांग की, जिससे स्पष्ट रूप से ज़ाहिर है कि अमेरिका डीपीआरके के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करना चाहता है। उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि डीपीआरके के सैद्धांतिक रुख़ में कोई बदलाव नहीं आएगा। अगर भविष्य में अमेरिका सलाह-मशविरे को फिर शुरु करेगा, तो डीपीआरके का प्रस्ताव भी नहीं बदलेगा।

इस बार की भेंटवार्ता में दोनों पक्षों की समान चिंता वाले केंद्रिय मामले पर विचार-विमर्श भी किया गया।

डीपीआरके का परमाणु मुद्दा लगातार दशकों से जारी रहा है। लेकिन एक या दो बार की शिखर वार्ता से इसके समाधान की उम्मीद नहीं है। इस बार की भेंटवार्ता के परिणाम से डीपीआरके के परमाणु मुद्दे की जटिलता दिखाई गई। लेकिन अमेरिका और डीपीआरके ने वार्ता से एक दूसरे की चिंता वाले मामले का समाधान करने की कोशिश की। इसलिए पिछले एक वर्ष से लंबे समय में कोरियाई प्रायद्वीप पर तनाव धीरे-धीरे कम हुआ है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को इस पर पूरी तरह प्रोत्साहन और सहायता देना चाहिए, ताकि कदम दर कदम डीपीआरके के परमाणु मुद्दे का समाधान किया जा सके।

(वनिता)

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