टिप्पणीः अटलांटिक महासागर पारीय संबंधों में दरार दिन ब दिन चौड़ी

2019-03-12 12:01:17

इधर के दिनों में अमेरिका और यूरोप की मीडिया ने खबर देकर कहा कि यूरोपीय संघ अमेरिकी पर्यटकों को मुक्त वीजा की इजाजत नहीं देगा। इस पर यूरोपीय संघ ने इस अफ़वाह का खंडन कर कहा कि यह बिलकुल मीडिया की गलत समझ है। यूरोप द्वारा अमेरिकी नागरिकों से 2021 से यूरोपीय शेंगेन क्षेत्र जाने के लिए ईटीआईएस का आवेदन देने की मांग अमेरिका समेत अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों की एक नियमित जांच है। जिसका मकसद गैरकानूनी आप्रवासियों और आतंकवाद के खतरे से निपटना है। जबकि अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने भी वक्तव्य जारी कर जोर दिया कि ईटीआईएस वीजा न देना किसी भी देश को अपने देश में प्रवेश करने के मापदंड बनाने का अधिकार है।

इसलिए यूरोपीय संघ द्वारा लागू की जाने वाली ईटीआईएस व्यवस्था वास्तव में अमेरिका की ईएसटीए सिस्टम से बराबर है, जिसमें मुख्यतः देश की सुरक्षा पर ख्याल कर बगैर वीजा के लोगों के देश में प्रवेश करते समय पंजीकरण करने की मांग की जाती है। लेकिन ईटीआईएस से प्रभावित करीब 60 देशों के नागरिक हैं, क्यों सिर्फ अमेरिकी नागरिकों के बर्ताव पर लोगों का ज्यादा ध्यान गया? निसंदेह अमेरिका और यूरोप के बीच दरार बढ़ने के साथ साथ किसी भी छोटी गलतफहमी से संभवतः बड़ा तूफान आ सकता है। अटलांटिक महासागर पारीय संबंध जटिल बन रहे हैं।

इधर के दो सालों में अमेरिका और यूरोप ने व्यापारिक नीति, नाटो की सुरक्षा, यूरोपीय एकीकरण, शरणार्थियों व प्रवासियों की नीति और वैश्विक प्रशासन आदि क्षेत्रों में गतिरोध व मतभेद नज़र आये हैं, कई बार खुली और तीव्र मुठभेड़ भी पैदा हुई थी। उदाहरण के लिए अमेरिका सरकार ने नाटो के गठबंधन देशों की शिकायत की कि उन्होंने रक्षा सहयोग में कम पैसे लगाए हैं। अमेरिका ने उनसे इस साल के अंत में फौजी खर्च को बढ़ाने की मांग की। उधर, अमेरिका पर निर्भरता से छुटकारा पाने के लिए फ्रांसिसी राष्ट्रपति और जर्मनी की चांसलर ने क्रमशः एक सच्ची यूरोपीय सेना का गठन करने का सुझाव पेश किया।

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