टिप्पणी:चीन-फ्रांस कूटनीतिक संबंध की 55वीं वर्षगांठ पर पालन करने योग्य मापदंड

2019-03-25 11:31:01

टिप्पणी:चीन-फ्रांस कूटनीतिक संबंध की 55वीं वर्षगांठ पर पालन करने योग्य मापदंड

साल 2018 में जी-20 के ब्यूनस आयर्स शिखर सम्मेलन के दौरान आयोजित एक न्यूज़ ब्रीफिंग पर लोगों का ध्यान केंद्रित हुआ था। चीनी स्टेट काउंसलर और विदेश मंत्री वांग यी, फ्रांसीसी विदेश मंत्री जीन-यवेस ले ड्रियन और संयुक्त राष्ट्र महालचिव एंटोनियो गुटेरेस ने एक साथ विभिन्न देशों की मीडिया के सामने जलवायु परिवर्तन के समान रुप से मुकाबला करने का वचन दिया, जिससे जलवायु परिवर्तन के मामले पर न केवल तीनों पक्षों का महत्व, बल्कि चीन और फ्रांस के जलवायु परिवर्तन के मुकाबले में घनिष्ठ सहयोग भी जाहिर हुआ।

चीनी सर्वोच्च नेता शी चिनफिंग ने कहा कि“चीन और फ्रांस विशेष दोस्त हैं।”चीनी जनता की यादों में फ्रांस एक ऐसा देश है, जो नए चीन की स्थापना के बाद चीन के साथ कूटनीतिक संबंध की स्थापना करने वाला पहला पश्चिमी देश है। चीन-फ्रांस की आवाजाही में फ्रांस ने कुछ पहला रचा है। मसलन् फ्रांस नए चीन के साथ प्रत्यक्ष हवाई लाइन शुरु करने वाला पहला पश्चिमी देश है, “चीनी संस्कृति वर्ष”मनाने वाला पहला देश है, चीनी सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना की पुष्टि देने वाला पहला देश है और विश्वविद्यालय में चीनी भाषा विभाग स्थापित करने वाला पहला पश्चिमी देश है।

गत शताब्दी के 60 वाले दशकों में जनरल चार्ल्स डे गॉल ने अद्भुत बुद्धि और साहस दिखाकर चीन लोक गणराज्य के साथ व्यापक कूटनीतिक संबंध स्थापित की, जिससे शीत युद्ध की बाधा तोड़ दी, पश्चिमी दुनिया और चीन के बीच दूरी कम हुई। चीनी जनता हमेशा इसकी प्रशंसक है और उनके मन में फ्रांस के साथ स्वाभाविक तौर पर विशेष भावना मौजूद है।

यह विशेषता फ्रांस की स्वतंत्र कूटनीतिक परंपरा से आती है। फ्रांस की खुद की रंगारंग संस्कृति है। वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य देश है, वह नाटो से मुक्त हुआ, इराक युद्ध का विरोध किया। फ्रांस और चीन भूमंडलीय जलवायु परिवर्तन के मुकाबले में अपरिहार्य नेतृत्वकारी भूमिका निभाते हैं। फ्रांस की कूटनीतिक स्वतंत्रता को अंतरराष्ट्रीय समुदाय में प्रशंसा मिली है।

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