टिप्पणीः वैश्विक प्रशासन पर चीन और फ्रांस की समान मूल्य अवधारणा

2019-03-26 18:31:02

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्य और विश्व की महत्वपूर्ण अर्थव्यवस्था के रूप में वैश्विक प्रशासन के कई मुद्दों पर चीन और फ्रांस के बीच सहयोग का आधार गहन है और सहयोग की गुंजाइश भी विशाल है, जिसका कारण है कि दोनों देशों की कई समान या मिली जुलती मूल्य अवधारणा है। इसमें एक महत्वपूर्ण बात ये है कि दोनों पक्ष बहुपक्षवाद की वकालत करते हैं।

पिछले वर्ष चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ मुलाकात में कहा था कि वर्तमान में एकपक्षवाद और संरक्षणवाद का विकास हो रहा है, दुनिया को पहले से कहीं ज्यादा बहुपक्षवाद की ज़रूरत है। संयुक्त राष्ट्र बहुपक्षवाद का झंडाबरदार है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन का विचार है कि बहुपक्षवाद वैश्विक चुनौतियों का मुकाबला करने का सबसे अच्छा तरीका है।

जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने के वैश्विक शासन में फ्रांस ने इसे आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाई है। इसके साथ चीन का समर्थन भी महत्वपूर्ण है। वास्तव में चीन ने न केवल पैरिस समझौते पर मज़बूत राजनीतिक वचन दिया है, बल्कि इस समझौते का पालन करने का महत्वपूर्ण अभ्यासक भी बना है।

चीन और फ्रांस बहु-ध्रुवीय दुनिया के प्रवर्तक और समर्थक हैं। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने "एक पट्टी एक मार्ग" का निर्माण करने का प्रस्ताव पेश किया। अब तक 150 से अधिक देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने इसमें भाग लिया है। पिछले वर्ष फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने चीन की यात्रा के दौरान फ्रांस का "एक पट्टी एक मार्ग" निर्माण में भाग लेने की घोषणा की । उनके विचार में यह समान जीत है। "एक पट्टी एक मार्ग" प्रस्ताव वैश्विक शासन के लिए चीन का सबसे बड़ा सार्वजनिक उत्पाद है।

वैश्विक शासन के क्षेत्र में चीन -फ्रांस संबंधों की रणनीतिक भूमिका है, जिससे यह भी निर्धारित होता है कि विश्व व्यवस्था की रक्षा करने के लिए दोनों देशों का सहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

(वनिता)

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