टिप्पणीः चीन अमेरिका व्यापार वार्ता में समान लाभ के विस्तार की ज़रूरत

2019-03-30 15:01:00

8वें दौर की चीन-अमेरिका उच्च स्तरीय व्यापार वार्ता 29 मार्च को पेइचिंग में संपन्न हुई। चीनी उपप्रधान मंत्री ल्यू ह और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि रॉबर्ट लाइटहाइज़र और वित्त मंत्री स्टेवन म्नुचिन ने इसकी अध्यक्षता की। दोंनों पक्षों ने समझौते के विषयों पर विचार किया और नयी प्रगति हासिल की।

इधर चार महीने में चीन और अमेरिका ने चार दौर की व्यापार वार्ता की है। अब वार्ता सबसे नाज़ुक और सबसे कठिन समय से गुज़र रही है। वार्ता में आगे बढ़ने का हर कदम आसान नहीं है। एक तरफ़ दोनों देशों के बीच सामाजिक व्यवस्था, संस्कृति, राष्ट्रीय स्थिति और विकास के चरण में बड़ा अंतर होता है। दूसरी तरफ चीन-अमेरिका व्यापार संबंध सिर्फ क्रय-विक्रिय का संबंध नहीं है। वह अत्यंत पेचीदा है।

कठिनाईयों के बावजूद दोनों देशों की वार्ता टीमों ने दोनों देशों के राज्याध्यक्षों के महत्वपूर्ण मतैक्य के मार्गदर्शन में बड़ी कोशिश की और ठोस प्रगति भी हासिल की। दोनों पक्षों को इसे मूल्यवान समझना चाहिए।

अमेरीक वाणिज्य मंत्रालय द्वारा 27 मार्च को जारी आंकड़ों के अनुसार इस जनवरी में चीन के प्रति अमेरिका का निर्यात 7 अरब 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर तक गिरा, जो वर्ष 2010 से सबसे निचले स्तर पर था। उधर इस साल के पहले दो महीने में अमेरिका के प्रति चीन के निर्यात और आयात में 19.9 प्रतिशत गिरावट आयी। चीन-अमेरिका व्यापार तनाव के मद्देनज़र आर्थिक सहयोग और विकास संगठन ने इस साल अनुमानित विश्व आर्थिक वृद्धि दर 3.5 प्रतिशत से 3.3 प्रतिशत तक घटायी। एक दूसरे पर टैरिफ़ बढ़ाने से चीन और अमेरिका, यहां तक कि पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव नज़र आ रहा है।

व्यापार वार्ता के नाजुक समय में अधिकाधिक समानताओं के विस्तार की बहुत ज़रूरत है। अमेरिका की मुख्य चिंताएं बौद्धिक संपदा अधिकार संरक्षण, बाज़ार प्रवेश और कार्यांवयन तंत्र है। अगर ये चिंताएं चीन में सुधार गहराने और खुलेपन का विस्तार करने की दिशा से मेल खाती हैं, तो चीन के नये दौर के सुधार और खुलेपन में उनका समाधान किया जाएगा।

अगले हफ्ते नौवें दौर की वार्ता वाशिंगटन में होगी । वार्ता की गति तेज़ होने के साथ दोनों पक्षों को अधिक साहस, बुद्धिमता और विश्वास से समानताओं का विस्तार कर एक साथ आगे बढ़ना चाहिए।

चीनी पक्ष अवश्य ही एक पारस्परिक लाभ और समान जीत वाले समझौते के लिए कोशिश करेगा। लेकिन अगर वार्ता संतोषजनक नहीं होगी, चीन स्थिरचित्त होकर इसका सामना करेगा । अपने कार्य को बखूबी अंजाम देना सब से महत्वपूर्ण है।

(वेइतुंग )

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