अमेरिका का आईएनएफ़ संधि से हटना गलत फैसला : ब्रिटेन में चीनी राजदूत

2019-05-06 13:33:00

ब्रिटेन के प्रमुख समाचार पत्र《फाइनेंशियल टाइम्स》ने 5 मई को ब्रिटेन स्थित चीनी राजदूत ल्यू श्याओमिंग द्वारा लिखा गया《अमेरिका का आईएनएफ़ संधि से हटना गलत फैसला》शीर्षक नामांकित लेख प्रकाशित किया।

लेख में कहा गया कि गत शदाब्दी के 80 के दशक में मैं अमेरिका में टफ्ट्स विश्वविद्यालय के फ्लेचर कानून और कूटनीति कॉलेज में अध्ययन कर रहा था। अमेरिका और सोवियत संघ साल 1987 में हस्ताक्षरित“इंटरमीडिएट-रेंज परमाणु फोर्सेज”यानी आईएनएफ़ संधि पर तीव्र वार्ता कर रहे थे।

शीत युद्ध काल में भू-रणनीति और शस्त्र नियंत्रण मुद्दे के अनुसंधान करने वाले विद्वान के रूप में मुझे अमेरिका और सोवियत संघ के बीच उपरोक्त तीव्र वार्ता पर बड़ी रुचि थी और उसे अपना अनुसंधान का विषय बनाया। मैंने अपने पेपर में लिखा कि अगर यह संधि संपन्न हुई और इसका ठोस रूप से कार्यान्वयन किया जाए, तो वह विश्व में स्थाई शांति की बुनियाद बनेगी। मेरे पेपर को फ्लेचर कॉलेज में प्रौफेसरों का उच्च आकलन प्राप्त हुआ और“ए”अच्छा अंक मिला।

इसके बाद ऐतिहासिक विकास से साबित हुआ कि मेरा निष्कर्ष सही है। साल 1987 में हस्ताक्षर की गई आईएनएफ़ संधि ने विश्व शांति के लिए सक्रिय भूमिका निभाई। लेकिन हाल में अमेरिका और रूस ने क्रमशः इस संधि से हटने का एलान किया। अमेरिका ने रूस पर इस संधि का पालन न करने का आरोप लगाया और साथ ही चीन के मुकाबले में कहा कि चीन ने मध्यम दूरी की मिसाइल का विकास किया। यह आरोप बिलकुल निराधार है, जो अस्वीकार्य है।

सबसे पहले, आईएनएफ़ संधि का मूल द्विपक्षीय है, न कि बहुपक्षीय। दूसरा, चीन हमेशा से शांतिपूर्ण विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है और रणनीतिक शक्ति के विकास पर संयमता अपनाता है। तीसरा, आईएनएफ़ संधि के मुद्दे पर अमेरिका ने दूसरे देशों की शिकायत की, जिसका वास्तविक उद्देश्य खुद पर लगाये गये प्रतिबंध को हटाकर विस्तार वाली सैन्य रणनीति का पालन करना है।

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