पश्चिम जगत को चीन के साथ आदान प्रदान करने का सही तरीका निकालना है

2019-05-07 23:02:00

ब्रिटेन के चीन के सवाल पर मशहूर विशेषज्ञ और कैंब्रिज विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अध्ययनकर्ता मार्टिन जैक ने हाल ही में आलेख लिखकर कहा कि पश्चिम जगत खासकर अमेरिका को चीन के साथ आदान प्रदान करने का सही तरीका निकालना चाहिए। अमेरिका को नये विश्व के अनुरूप होकर चीन को एक समानतापूर्ण प्रतिद्विंदी स्वीकार करना और चीन के साथ सहयोग तथा मुकाबले का नया तरीका तय करना चाहिए ।  

उन्होंने “चीन किस तरह का बड़ा देश बन जाएगा” नाम एक आलेख में कहा कि पश्चिमी जगत की एक बड़ी समस्या है कि वे वास्तव में चीन को नहीं समझते। उन के विचार में विश्व में सिर्फ एक ही आधुनिकता है यानी पश्चिम की आधुनिकता। लेकिन ऐसा विचार आउटडेट हो गया है। विश्व में न सिर्फ चीन में कायापलट हुआ है ,बहुत ही विकासशील देशों का इतिहास ,राजनीति और संस्कृति का स्रोत पश्चिम से अलग है। इस पृष्ठभूमि में पश्चिमी जगत क चीन और पश्चिम के बीच मौजूद अंतर समझने की कोशिश करनी चाहिए।

उन्होंने अपने आलेख में चीन और पश्चिम जगत की तुलना में कहा कि पश्चिमी परंपरा और चीनी परंपरा वास्तव में दो मार्गों की है। पश्चिम सैन्य शक्ति पर बल देता है ,जबकि चीन सांस्कृतिक शक्ति पर बल देता है।

उन्होंने कहा कि विश्व के बड़े देश के नाते चीन की कई बड़ी विशेषताएं हैं। पहला,आर्थिक सुधार उल्लेखनीय है। दूसरा ,वैदेशिक संबंध में चीन विकासशील देशों के साथ संबंधों को प्रथमिकता देता है। तीसरा, बेल्ट एंड रोड से प्रशासन मॉडल में बड़ा परिवर्तन आने की संभावना होगी। चौथा ,चीन अमेरिका संबंध। चीन अमेरिका प्रतिस्पर्द्धा का मूल सवाल व्यापार के बजाये सृजन है। चीनी आर्थिक पुनरुत्थान अमेरिका के लिए गंभीर चुनौती है। लेकिन इस के निपटारे के लिए संरक्षणवाद का सहारा लेना गलत है।

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