ताइवान से संबंधित प्रस्ताव पारित करने से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की आलोचना

2019-05-10 11:35:00

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने 7 मई को "2019 ताइवान गारंटी कानून" तथा "ताइवान के प्रति अमेरिकी प्रतिबद्धता और ताइवान संबंध अधिनियम के कार्यान्वयन के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुन: पुष्टि" पारित किया। इस पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित हुआ और कहना है कि इससे चीन-अमेरिका संबंधों तथा थाइवान जलडमरूमध्य की शांति को हानि पहुंचायी जाएगी।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव के उप प्रवक्ता ने कहा कि वर्ष 1971 में पारित संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव के मुताबिक एक चीन सिद्धांत का दृढ़ता से समर्थन करेगा।

रूसी रेडियो "रूसी आवाज" के एशिया सवाल पर विशेषज्ञ एलेक्जेंडर ज़ेलेकोव ने कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में ताइवान प्रस्ताव पारित करने से चीन और अमेरिका के बीच संपन्न तीन संयुक्त विज्ञप्तियों का उल्लंघन किया गया है। ये प्रस्ताव प्रभावित होने से चीन अमेरिका संबंधों को गंभीरता से हानि पहुंचायी जाएगी।

मलेशिया चीन सार्वजनिक संबंध संघ के उप प्रधान यैन थ्यैन लू का कहना है कि अमेरिका को एक चीन के सिद्धांत तथा तीन चीन-अमेरिका संयुक्त विज्ञप्तियों का पालन करना चाहिये।

क्यूबाई अंतर्राष्ट्रीय राजनीति प्रतिष्ठान के शोधकर्मी एदूर्डो रिगाल्डो ने कहा कि अमेरिका ने थाइवान सवाल का प्रयोग कर चीन के विकास को रोकना चाहा। जिससे चीनी जनता की भावना तथा द्विपक्षीय संबंधों को हानि पहुंचायी गयी है।

अर्जेंटीणा के अंतर्राष्ट्रीय सवाल पर विशेषज्ञ गोनज़ालो ट्रोर्डिनी ने कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने ताइवान संबंधी प्रस्ताव को पारित कर चीन के अन्दरूनी मामले में एक बार फिर हस्तक्षेप किया है।

नाइजीरिया के चीन अनुसंधान केंद्र के प्रधान चार्ल्स ओनुनाइजू ने कहा कि थाइवान सवाल चीन के केंद्रीय हितों से संबंधित है। अमेरिका को ताइवान को हथियार बेचने जैसे चुनौतियों को बन्द करना चाहिये।

मिस्र के अख़बार एल-अहराम अखबार के वरिष्ठ संवाददाता सैमी एल्कमहोवे ने कहा कि यह बिल्कुल तथ्य है कि ताइवान चीन का अखंडनीय हिस्सा है। अमेरिका ने एक चीन के सिद्धांत का उल्लंघन कर चीन के अन्दरूनी मामलों में हस्तक्षेप किया है।

( हूमिन )

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