बौद्धिक संपदा की संरक्षण पर अमेरिका ने जान बूझकर चीन को गंदी कर दी

2019-05-20 17:31:00

चीन व अमेरिका के बीच व्यापारिक संघर्ष पैदा होने के बाद अमेरिका ने अपनी मांग पूरी करने के लिये लगातार झूठा बोलकर जान बूझकर चीन को गंदी कर दी। अमेरिका ने चीन पर बौद्धिक संपदा की चोरी करने की कथन कही। इस की चर्चा में कई विशेषज्ञों व विद्वानों ने कहा कि यह कथन सही व गलत को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है। जो विशेष उद्देश्य के लिये एक राजनीतिक चाल है।

पेइचिंग विश्वविद्यालय के बौद्धिक संपदा कॉलेज की उप डीन सुश्री च्यांग फिंग दस से अधिक सालों में लगातार चीन व अमेरिका के बीच बौद्धिक संपदा के संरक्षण मामले का अध्ययन करती रहती हैं। उन्होंने कहा कि दसेक सालों के अध्ययन व आंकड़ों से यह जाहिर हुआ है कि अमेरिका एक तरफ़ बौद्धिक संपदा लाइसेंस का महंगा शुल्क लेता है, दूसरी तरफ़ व्यापारिक लाभ की गणना में अमेरिका द्वारा बौद्धिक संपदा से प्राप्त लाभ को उपेक्षा करता है।

वर्ष 2016 में चीन ने अमेरिका को बौद्धिक संपदा के प्रयोग के लिये 7 अरब 96 करोड़ अमेरिकी डॉलर का शुल्क दे दिया है। जो अमेरिका द्वारा लिये गये सभी शुल्क के एक चौथाई तक पहुंच गया। यह कहा जा सकता है कि चीन ने कारगर रूप से बौद्धिक संपदा का संरक्षण किया है। और अमेरिकी उद्यमों को इससे बहुत लाभ मिला है। लेकिन अमेरिका इसे उपेक्षा करता है।

चंद्रिमा

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