टिप्पणीः अमेरिका वैश्विक घाटे का प्रमुख निर्माता है

2019-05-20 19:31:00

चोर का उल्टे कोतवाल को डांटना अमेरिका द्वारा प्रतिद्वंद्वियों पर दबाव डालने का हमेशा का हथकंडा है। उदाहरण के लिए 11वें दौर की चीन-अमेरिका आर्थिक व व्यापारिक वार्ता से पहले अमेरिका ने अचानक चीन की निंदा की कि चीन ने व्यापारिक वार्ता में अपने वचन का उल्लंघन किया। साथ ही इस बहाने से 2 खरब अमेरिकी डॉलर मूल्य वाली चीनी वस्तुओं पर टैरिफ़ 10 प्रतिशत से 25 प्रतिशत तक बढ़ाया। वास्तव में दोनों ने कुछ मुद्दों पर बार बार वार्ता करने के बाद कदम ब कदम सहमतियों को समझौते के कार्यान्वयन में शामिल करना वार्ता का सार ही है। समझौते पर पहुंचे बिना अमेरिका ने क्यों चीन की निंदा की?

फिर भी अमेरिका अकसर अपना वचन तोड़ता है। एक साल पहले 19 मई को चीन और अमेरिका ने संयुक्त वक्तव्य जारी कर एलान किया कि दोनों ने व्यापारिक युद्ध न करने पर सहमति जताई है। लेकिन सिर्फ दस दिनों के बाद ह्वाइट हाऊस ने अचानक समझौते को तोड़कर चीन द्वारा निर्यातित 50 अरब अमेरिकी डॉलर की वस्तुओं पर 25 प्रतिशत के टैरिफ़ लगाने की घोषणा की। गत वर्ष के दिसम्बर में चीन और अमेरिका ने व्यापार की खरीदारी की मात्रा पर सहमति प्राप्त की, लेकिन इस के बाद की वार्ता में अमेरिका ने निरंतर मात्रा को बढ़ाने की कोशिश की। यहां तक फिर एक बार टैरिफ़ बढ़ाने की धमकी दी, जिस से वार्ता की प्रक्रिया को गंभीर नुकसान पहुंचा।

अमेरिका ने इसलिए ऐसा किया कि वह खुद को विश्व घाटे के निर्माता के रूप में छिपा सके। हाल में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय घाटे का निपटारा करने, मंदी का विश्वास करने, शांति घाटे और विकास घाटे की समान चुनौतियों का सामना कर रहा है। विश्व के सब से बड़े देश होने के नाते अमेरिका न केवल इन घाटों को मिटाने के लिए प्रयास नहीं करता, बल्कि घाटे का प्रमुख निर्माता बन गया है।

उदाहरण के लिए अमेरिका ने खुद के हितों को अंतर्राष्ट्रीय संधि के ऊपर रखा और अमेरिका प्रथम की नीति अपनायी। अमेरिका ने जानबूझकर समूहों और गठबंधों को हटाया, जिस ने गंभीर रूप से बहुपक्षीय व्यवस्था, अंतर्राष्ट्रीय नियमों को नुकसान पहुंचाया, साथ ही वैश्विक प्रशासन घाटे को तीव्र भी बनाया।

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