टिप्पणीः टैरिफ़ लाठी चीन में विदेशी कारोबारों को डरा कर पीछे नहीं हटा सकेगी

2019-05-23 18:01:00

अमेरिका ने हाल में कहा कि चीन द्वारा निर्यातित वस्तुओं पर टैरिफ़ बढ़ाने की स्थिति में कुछ कारोबार चीन से वियतनाम और अन्य एशियाई देशों में स्थानांतरित होंगे। जबकि कुछ अमेरिकी कारोबार अमेरिका वापस लौटेंगे। इन दलीलों ने बाज़ार के आर्थिक नियमों की जानकारी का उल्लंघन किया है, जो अमेरिकी पक्ष की मनोगत कल्पना है।

यह सर्वविदित है कि हाल में चीन का अर्थतंत्र उच्च गुणवत्ता की ओर विकसित हो रहा है। वैश्विक उद्योग चेन और मूल्य चेन में चीन का स्थान निरंतर बढ़ रहा है। टेक्सटाइल वेशभूषा और जूते समेत छोटे व मझौले विनिर्माण उद्योग बाहर नांतरित किया जाना वैश्विक उद्योग के स्थानांतरण के विकास नियम से मेल खाता है। साथ ही चीन के खुलेपन के परिवर्तन की प्रवृत्ति से भी मेल खाता है। अगर अमेरिका जानबूझकर उन दोनों को जोड़ना चाहता है, तो भी टैरिफ़ की लाठी से चीन में विदेशी कारोबारों को डराकर पीछे हटाना चाहता है।

लेकिन अमेरिका की इस दलील का खंडन हो चुका है। जापानी व्यापारिक पुनरुत्थान संस्था द्वारा हालिया जारी रिपोर्ट के मुताबिक जापानी कारोबारों के विदेशी निर्यात व पूंजी निवेश की रणनीति में चीनी बाजार पहले स्थान पर रहा है। इस साल के पहले चार महीनों में चीन में विदेशी पूंजी के वास्तविक इस्तेमाल में 6.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी आयी है। चीन में अमेरिका के निवेश में 24.3 प्रतिशत का इज़ाफ़ा हुआ। 98 प्रतिशत के अमेरिकी कारोबार कहते कि वे चीनी बाजार का विस्तार करेंगे।

अमेरिकी पक्ष क्यों निरंतर टैरिफ़ बढ़ाकर अमेरिकी निर्माण को अमेरिका में वापस नहीं बुला सकता है?कारण यह है कि चीन में अमेरिका के निवेश मुख्यतः संचार उपकरण, कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, रासायनिक कच्चे सामग्री आदि उच्च विनिर्माण उद्योग केंद्रित हैं। जबकि इन क्षेत्रों में कुशल मज़दूरों की बड़ी आवश्यकता है। एपल कंपनी की मिसाल लें, विश्व में उस के करीब 800 कारखाने हैं, जिन में लगभग आधे चीन में हैं। अगर एपल का उत्पादन और संयोजन सभी चीन से अमेरिका में हो गया, तो एपल कंपनी के उत्पादन खर्चे में 37 प्रतिशत का इज़ाफ़ा होगा।

न्यूज़ व्यापार पर्यटन बाल-महिला स्पेशल विश्व का आईना चीनी भाषा सीखें वीडियो फोटो गैलरी