टिप्पणीः 1.4 अरब आबादी वाले बाजार पर पाबंदी लगाना नामुमकिन

2019-05-24 19:31:00

इधर के दिनों में कई विदेशी कारोबारों ने हुआवेइ कंपनी के साथ सहयोग बंद करने की दलील को ठुकरा दिया और कहा कि वे अमेरिकी सरकार के प्रतिबंध ऐलान से हुआवेइ को सप्लाई बंद नहीं कर सकते हैं। इस से साबित हुआ है कि हुआवेइ के खिलाफ़ निर्यात पाबंदी के ऐलान ने अमेरिकी कारोबारों समेत अनेक विदेशी कारोबारों के हितों को नुकसान पहुंचाया है। कई अमेरिकी राजनयिकों द्वारा 1.4 अरब आबादी की चीनी बाजार पर पाबंदी लगाने की कुचेष्टा नामुमकिन है।

जापानी तोशिबा कंपनी से जर्मनी के इंफ़िनिओन तक, उन्होंने इसलिए तुरंत अफ़वाहों पर सफ़ाई दी, कारण यह है कि अमेरिका की निराधार अत्याचार कार्यवाई ने बाजार के आर्थिक नियमों का उल्लंघन किया है, साथ ही उन के यथार्थ हितों को गंभीर रूप से नुकसान भी पहुंचाया है।

चीनी बाजार पर पाबंदी लगाने के लिए अमेरिका ने एक तरफ़ टैरिफ़ को बढ़ाकर व्यापारिक युद्ध छेड़ा है। दूसरी ओर अमेरिका ने लोकमत युद्ध छेड़कर अफ़वाह फैलायी। हालांकि अमेरिका ने इस तरह कार्यवाई की, फिर भी चीन के विदेशी व्यापार का प्रदर्शन अच्छा रहा। इस साल के पहले चार महीनों में चीन के विदेशी व्यापार के आयात निर्यात की कुल राशि में 4.3 प्रतिशत का इज़ाफ़ा हुआ। खास तौर पर चीन और बेल्ट एंड रोड से जुड़े देशों के बीच व्यापारिक रकम की वृद्धि दर 9.1 प्रतिशत तक पहुंची है।साथ ही 2008 से 2017 तक चीनी आर्थिक विकास में भीतरी मांग की वार्षिक योगदान दर 100 प्रतिशत से अधिक पहुंची है, जो चीन के आर्थिक विकास को प्रेरित करने की निर्णायक शक्ति बन चुकी है। विदेशी व्यापार पर चीन की निर्भरता 33 प्रतिशत तक कम हो चुकी है। जबकि अमेरिका अंतर्राष्ट्रीय बाजार पर बहुत निर्भर करता है। अमेरिका द्वारा चीन में निर्यातित सोयाबीन की मात्रा घरेलू उत्पादन मात्रा की करीब 60 प्रतिशत है, लेकिन टैरिफ़ बढ़ाने की वजह से चीन के प्रति सोयाबीन की निर्यात मात्रा में कटौती आने की वजह से अमेरिकी किसानों को जापान, मैक्सिको आदि अन्य देशों को निर्यातित करना पड़ता है। लेकिन इन देशों की आयात मात्रा जोड़ कर भी चीनी बाजार की मांग से कम होती है। अमेरिका द्वारा टैरिफ़ बढ़ाने से लाया गया खर्च अमेरिकी आयात व्यापारी और उपभोक्ताओं को उठाना पड़ता है।

चीन के अर्थतंत्र का सागर किसी भी तूफ़ान में रह सकेगा। चाहे अमेरिका कैसा भी दबाव क्यों न डाले, चीन हमेशा विश्व के समक्ष द्वार खोलेगा और विश्व निवेश का गर्म स्थल बनेगा। जबकि अमेरिकी राजनयिक अमेरिका के जहाज़ को विश्व से अलग रखने के पृथक द्वीप की ओर ला रहे हैं।

(श्याओयांग)

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