टिप्पणीः अमेरिका की जगह लेने का चीन का कोई इरादा नहीं है

2019-05-29 20:31:00

फिलहाल किसी अमेरिकी राजनीतिज्ञ ने दावा किया कि चीनी अर्थव्यवस्था तेजी से विकसित हो रही है ।चीन अमेरिका से अधिक शक्तिशाली होगा ।उनका कहना है कि चीन विश्व का नंबर एक सुपर पावर बनना चाहता है ।वास्तव में चीन ने कभी भी अमेरिका की जगह लेकर अपना विकास करने का लक्ष्य नहीं अपनाया ।चीन के खिलाफ कुछ अमेरिकी राजनीतिज्ञों के जिद्दी विचार से जाहिर है कि वे रणनीतिक चिंता में फंसे हुए हैं ।

शीत युद्ध के बाद अमेरिका ने विश्व में एकमात्र सुपर पावर का स्थान स्थापित किया ।आज तक अर्थव्यवस्था ,वित्त ,विज्ञान व तकनीक और सैन्य शक्ति में अन्य देशों की तुलना में उस की स्पष्ट बढ़त है ।स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018 में अमेरिकी सैन्य खर्च 6 खरब 40 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक रहा ,जो विश्व में सर्वाधिक है और अपने पीछे के 8 देशों के सैन्य खर्च की कुल धनराशि के बराबर है।

ऐसी स्थिति में कुछ अमेरीकियों को पर्याप्त सुरक्षा महसूस नहीं होती ।वे संपूर्ण बढ़त और सुरक्षा चाहते हैं । चीन के प्रति कुछ अमेरिकी राजनीतिज्ञों की दुश्मनी बढ़ने का स्रोत यही है कि वे अपनी शक्ति के कम होने से डरते हैं और चीन से पीछे होने की चिंता करते हैं ।इसके अलावा चीन को निशाना बनाना घरेलू प्रतिद्वंद्वी स्थानांतरित करने के लिए मददगार है ।

चालीस साल के सुधार और खुलेपन से चीनी आर्थिक ,वैज्ञानिक और तकनीकी शक्ति का तेज विकास हुआ है ।चीन और अमेरिका के बीच राष्ट्रीय शक्ति का फासला कम हो रहा है ।लेकिन अब भी यह फासला बड़ा है ।

चीन के प्रति वर्तमान और भविष्य में सब से महत्वपूर्ण कार्य आर्थिक निर्माण और देश के विकास पर फोकस करना है ताकि चीनी जनता अधिक सुखमय और सुंदर जीवन बिताए ।चीन अपने काम में जुटा रहेगा ।चीन को अमेरिका की जगह लेने का इरादा और शक्ति नहीं है और दूसरे देश के साथ दुष्ट प्रतिस्पर्द्धा नहीं करना चाहता ।शांतिपूर्ण विकास के अवधाऱण पर कायम रहने वाला चीन विभिन्न देशों के लिए अधिक बड़े अवसर लाएगा ।

कुछ अमेरिकी राजनीतिज्ञों के विचार में चीन के विकास का लक्ष्य विश्व प्रभुत्व जमाना है ।यह या तो चीन पर गलत समझ है या चीन पर कीचड़ उछालना है ।

वर्तमान में अगर चीन अमेरिका व्यापार संघर्ष का उचित समाधान नहीं होता ,तो न सिर्फ दोनों देशों के हितों को नुकसान होगा ,बल्कि पूरे विश्व के हितों को भारी हानि होगी ।(वेइतुंग)

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