चीन में धूम्रपान करने वाले लोगों की संख्या में कमी आयी

2019-06-19 19:01:02

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने साफ़ किया है कि 80 प्रतिशत फेफड़े का कैंसर धूम्रपान से होता है। चीनी बीमारी की रोकथाम और नियंत्रण केंद्र से जारी ताज़ा पड़ताल के परिणामों से ज़ाहिर है कि चीन में 15 वर्ष और इससे अधिक वर्ष की आयु के समुदाय में धूम्रपान करने वालों की संख्या पिछली पड़ताल की तुलना में कम हुई है। पैसिव स्मोकिंग की स्थिति में सुधार आया है । नो स्मोकिंग वातावरण संबंधी नीति का समर्थन करने वालों का अनुपात पहले ही बढ़ा हुआ है।

चिकित्सा अध्ययन से ज़ाहिर है कि स्मोकिंग से कई रोग पैदा होते हैं ।पूरे विश्व में लोग उच्च रक्तचाप के बाद सबसे ज्यादा धूम्रपान से जान गंवाते हैं। चीन में 30 करोड़ से अधिक धूम्रपान करने वाले हैं। हर साल धूम्रपान से मरने वाले लोगों की संख्या दस लाख से अधिक है। कैपिटल चिकित्सा विश्वविद्यालय के फेफड़े कैंसर केंद्र के निदेशक ची श्योयी ने बताया कि सबसे अस्वस्थ जीवन तरीकों में धूम्रपान पहले स्थान पर है। उन्होंने बताया ,धूम्रपान में कैंसर संबंधी पदार्थ की 69 किस्में हैं ,जो अब साफ़ हो गया है ।लंबे समय तक धूम्रपान करने से हमारी ब्रांकस झिल्ली क्षतिग्रस्त होती है और अंत में फेफड़े का कैंसर बन जाता है। 80 प्रतिशत से अधिक फेफड़े के कैंसर से ग्रस्त लोग धूम्रपान से जुड़े हैं, जिसमें पैसिव स्मोकिंग और इससे गर्भवती स्त्री के बच्चे को भी नुकसान होता है। चीन में 35 करोड़ लोग धूम्रपान करते हैं और 74 करोड़ लोग पैसिव स्मोकर्स के शिकार हैं ।इसी स्थिति से हमारे देश में फेफड़े के कैंसर की दर ऊंची रहती है।

चीनी रोग रोकथाम और नियंत्रण केंद्र के उपनिदेशक ली शिन हुआ ने बताया कि किसी आयु वर्ग में भी धूम्रपान से लाभ नहीं मिलता है। जितनी जल्दी धूम्रपान छोड़ा जाए उतना ही अच्छा होगा।

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