टिप्पणी:जी 20 शिखर सम्मेलन में वैश्किवकरण के खिलाफ प्रवृत्ति को रोकना चाहिये

2019-06-25 17:31:00

14वें जी20 शिखर सम्मेलन का आयोजन 27 जून को जापान को ओसाका में शुरू होगा। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग में सम्मेलन में भाग लेंगे और वैश्विक अर्थतंत्र के शासन पर चीन के रुख पर प्रकाश डालेंगे।

जी20 शिखर सम्मेलन संकट के साथ आया था। वर्ष 2008 में वित्तीय संकट अमेरिका से विश्व भर तक फैलने लगी। विश्व भर में आर्थिक मंदी के मुकाबले में जी 20 के सदस्य देशों के नेताओं ने वाशिंग्टन में प्रथम बार विचार विनिमय शुरू किया जिसमें विकासमान देशों और नव उभरती शक्तियों की अहम भूमिका साबित हुई। इधर के दस सालों में जी 20 शिखर सम्मेलन की मुख्य संरचना संकट का मुकाबला करने से वैश्विक अर्थतंत्र के दीर्घकालीन शासन तक मुड़ गयी है। लेकिन एकतरफावाद, संरक्षणवाद और काउंटर वैश्वीकरण प्रवृत्ति निरंतर नजर आ रही है। अमेरिका ने एक तरफा तौर पर व्यापारिक घर्षण छेड़ा है जिससे दूसरे जी 20 सदस्यों को नुकसान पहुंचा है। आर्थिक सहयोग व विकास संगठन के मुताबिक इस साल के पहले तिमाही में जी 20 के अनेक सदस्यों के निर्यात और आर्थिक वृद्धि कमजोर बन गयी है। दक्षिण कोरिया, ब्राजील, रूस, इंडोनेशिया और जापान जैसे देशों के निर्यात रकम में स्पष्ट गिरावट नजर आयी। विश्व के प्रमुख संगठनों और संस्थाओं ने आर्थिक विकास की उम्मीद को कम कर दिया। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष का मानना है कि व्यापार घर्षण से विश्व की व्यापारिक वृद्धि वित्तीय संकट से सबसे निम्न स्तर पर जा पहुंचेगी। विश्व बैंक की रिपोर्ट ने वर्ष 2019 की वैश्विक आर्थिक विकास उम्मीद को 2.6 प्रतिशत तक गिराया। अनुमान है कि अमेरिका और चीन के बीच व्यापार घर्षण से विश्व व्यापार रकम में 1 प्रतिशत की कटौती संपन्न हो सकेगी। मॉर्गन स्टेनली की नवीनतम रिपोर्ट का कहना है कि विश्व भर की आर्थिक मंदी नौ महीनों के बाद नजर आएगी।

उधर जी 20 देशों के पास विश्व की 66 प्रतिशत जनसंख्या और 85 प्रतिशत अर्थतंत्र प्राप्त है। जी 20 शिखर सम्मेलन के इतिहास से यह साबित है कि सदस्यों के बीच समंव्य और सहयोग करने से वे संकट को समाधान करने और विश्व अर्थतंत्र को सही कक्षाओं में वापस पहुंचाने में समर्थ हैं।

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