टिप्पणी:चुंगी लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा

2019-06-27 20:31:00

चीन और अमेरिका के सर्वोच्च नेता जी 20 के ओसाका शिखर सम्मेलन में वार्तालाप करेंगे। पर इसी वक्त पर अमेरिका के कुछ सूत्रों ने यह धौंस दी है कि अगर चीन और अमेरिका के बीच व्यापार घर्षण पर समझौता नहीं संपन्न होगा, तो अमेरिका चीनी मालों के खिलाफ और अधिक चुंगी लगाएगा। लेकिन ऐसे करने से दोनों देशों के राष्ट्रपतियों के बीच संपन्न सहमतियों का उल्लंघन होता है। इससे समस्याओं के समाधान के लिए मददगार नहीं होगा।

व्यापार के प्रति चीन का रुख सतत है। बीते एक साल में चीन सबसे ज्यादा ईमानदारी दिखाकर अमेरिका के साथ 11 चरणों की वार्ता की और बड़ी प्रगतियां हासिल कीं। लेकिन अमेरिका ने तीन बार अपने वादाओं को तोड़कर कर-वसुली को उन्नत किया। जिससे चीन-अमेरिका वार्ता को विफल बनाया गया। मई माह में अमेरिका ने दो खरब अमेरिकी डालर के चीनी मालों को अधिक चुंगी लगाने का निर्णय लिया। चीन को इस के जवाब में कदम उठाना पड़ा। इन कदमों से चीन के अपने केंद्रीय हितों की रक्षा करने की कल्पना साबित की गयी है। अमेरिका को इसमें गलत निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिये।

अभी तक चीन और अमेरिका का अर्थतंत्र एक दूसरे का पूरक है। दोनों पक्षों को सहयोग करने से लाभ मिलेगा और प्रतिस्पर्द्धा करने से क्षति पहुंचेगी। व्यापार युद्ध करने से कोई विजेता नहीं बनेगा। वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार अमेरिका में 82 प्रतिशत आयातित मोबाइल फोन, 94 प्रतिशत लैपटॉप, 85 प्रतिशत तिपहिया और स्कूटर तथा 98 प्रतिशत खेल मशीन आदि चीन से आये हैं। इसलिए जब अमेरिकी सरकार ने तीन खरब अमेरिकी डालर के चीनी मालों पर अधिक चुंगी लगाने की धमकी दी, तब कई सौ अमेरिकी कारोबारों के प्रतिनिधियों ने परामर्श सभा में सरकार के इस कदम का विरोध प्रकट किया।

यह भी चर्चित है कि जी 20 शिखर सम्मेलन के आयोजन से पहले मेजबान देश जापान ने 2019 व्यापार श्वेतपत्र जारी किया जिसने बढ़ते जा रहे व्यापार संरक्षणवाद के प्रति चेतावनी दी। वास्तव में यह भी जी 20 में अधिकांश सदस्यों की समान चिन्ता है। अमेरिका के एकतरफा चुंगी वसुली कदम से जी 20 के सदस्यों को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। बहुपक्षवाद का समर्थन करने और एकतरफावाद व संरक्षणवाद का विरोध करने की आवाज़ ओसाका शिखर सम्मेलन में गूंज रही है।  

चीन जिम्मेदारना अर्थतंत्र होने के नाते अमेरिका के साथ व्यापारिक घर्षण को सतर्कता से निपटाएगा। लेकिन चीन किसी भी दबाव के सामने सिर नहीं झुकाएगा। और चीन किसी भी चुनौती का सामना करने को तैयार है। चीन और अमेरिका को समानता के आधार पर समझौता संपनन करना पड़ेगा। चुंगी वसुलने के दबाव से चीन प्रभावित नहीं होगा। केवल ईमानदारी दिखाने और समान दिशा की कोशिश करने से ही चीन-अमेरिका व्यापार घर्षण का समाधान किया जा सकेगा।

( हूमिन )

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