टिप्पणी: हांगकांग मामले और चीन के अंदरूनी मामले में हस्तक्षेप करने वाली षड़यंत्र जरूर विफल होगी

2019-07-02 20:01:00

लेकिन इस क्षण, कुछ पश्चिमी देश अचानक “सहिष्णुता” दिखाने लगे। उन्होंने अपराधियों के “शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार” की रक्षा वाली बात कही। क्या वे भूल गए कि उनके देश में हिंसक अपराधपूर्ण मामला पैदा होने के वक्त पुलिस ने हथियारों का प्रयोग कर प्रदर्शनकारियों से निबटते ? उदाहरण के लिए 2014 में अमेरिका के मिसौरी स्टेट के फर्ग्यूसन टाउन में एक अश्वेत युवक पुलिसकर्मी की गोली का शिकार हुआ। स्थानीय लोगों ने बड़े पैमाने पर जुलूस निकाला। अमेरिकी पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ़ आंसू गैस का प्रयोग किया और रबर गोलियां बरसायीं। लेकिन आज, हांगकांग में हिंसक लोगों ने कानून निर्माण परिषद की इमारत में घूस कर हमला किया। पश्चिमी ताकतों ने क्यों ”चयनात्मक अंधापन” का विकल्प चुना और अपराधियों का समर्थन किया ?

पश्चिमी देशों के इस दोहरे मापदंड वाली कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय कानून और अंतरराष्ट्रीय संबंध के आधारभूत नियमों का उल्लंघन किया और चीन की प्रभूसत्ता की सुरक्षा को नुकसान पहुंचाया। इससे लोगों को और स्पष्ट हुआ कि वे स्वतंत्र और मानवाधिकार की आड़ में हांगकांग की विपक्ष शक्तियों के साथ जुड़कर यहां के प्रशासनिक अधिकार को छीनना चाहते हैं और चीन में “एक देश दो व्यवस्थाओं” को नुकसान पहुंचाना चाहते है। उनके आगे का उद्देश्य चीन के विकास को बाधित करना है।

चीन में वापसी के बाद हांगकांग की जीडीपी वर्ष 1997 में 13.7 खरब हांगकांग डॉलर से 2018 में 28.4 खरब हांगकांग डॉलर तक पहुंच गई। प्रति हांगकांग वासी की औसतन जीडीपी 1997 में 2.1 लाख हांगकांग डॉलर से 2018 में 3.819 लाख तक पहुंच गई। क्वांगतोंग-हांगकांग-मकाओ विशाल खाड़ी क्षेत्र की स्थापना से हांगकांग के आर्थिक विकास को नया मौका मिला। हांगकांग की मीडिया ने कहा कि “एक देश दो व्यवस्थाएं” हांगकांग के विकास की सबसे बड़ी श्रेष्ठता है, जिससे न केवल हांगकांग को देश के विकास का लाभ मिला, बल्कि हांगकांग वासियों के विभिन्न अधिकारी और स्वतंत्रता की गारंटी दी गई।

बाहरी शक्ति के हस्तक्षेप के खिलाफ़ चीन सरकार का रूख हमेशा से दृढ़ है। यानी कि हांगकांग मामला चीन का अंदरूनी मामला है। किसी भी देश और बाहरी संगठन या व्यक्ति के पास इस में हस्तक्षेप करना का अधिकार नहीं है। अगर वह जिद्द करेगा, तो चीन अवश्य ही आगे की प्रतिक्रिया अपनाएगा। चीन के पास राष्ट्रीय प्रभूसत्ता वाले मामले की रक्षा करने का दृढ़ संकल्प है। हांगकांग मामले में हस्तक्षेप करने वाले की कुचेष्टा अवश्य ही विफल होगी।

(श्याओ थांग)

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