मेडिकल क्षेत्र में चीन में हैं भारत से बेहतर सेवाएं

2019-07-09 20:01:00

शांगहाई में सीआरआई की मुलाकात एक भारतीय डॉक्टर से हुई जो यहां पर सेंट माइकल अस्पताल में काम कर रहे हैं। इनका नाम डॉक्टर संजीव चौबे है, सीआरआई से हुई एक खास मुलाकात में डॉक्टर संजीव ने बताया कि उन्होंने मेडिसिन में ग्रैजुएशन महाराष्ट्र के पुणे से किया है, पोस्ट ग्रैजुएशन फिलीपींस से किया, फिर छै महीने सिंगापुर में काम करने के बाद भारत के नोएडा के मेट्रो अस्पताल और फिर इंदिरापुरम के एक अस्पताल में काम करने लगे, इसी दौरान डॉक्टर संजीव को शांगहाई आकर एक कांफ्रेंस में हिस्सा लेने का मौका मिला, यहां की मेडिकल सेवा से प्रभावित होकर डॉक्टर संजीव ने यहां पर एक नई शुरुआत की।

इनके अनुसार शांगहाई में मरीज़ों की भीड़ कम थी, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध थीं जिनके चलते ये चीन से बहुत प्रभावित हुए।

पुणे से मेडिसिन में ग्रैजुएशन की पढ़ाई करने के बाद नोएडा के मेट्रो अस्पताल में काम किया पोस्ट ग्रैजुएशन फ़िलीपींस से किया, बाद में छै महीने सिंगापुर में काम किया। वापस भारत जाकर नोएडा और इंदिरापुरम में काम किया, वर्ष 2012 में एक कांफ्रेंस के लिये शांगहाई में बुलाया गया, चीन के काम करने का तरीका बेहतर लगा, मरीज़ों की भीड़ कम थी, बेहतर हेल्थ सेवाएं थीं, जिससे संजीव प्रभावित हुए।

शांगहाई में भारतीय, फ्रंसीसी, अमेरिकी, अंतर्राषट्र्यी समुदाय को देखते हैं

डायबिटीज़, रयुमेटोलॉजी यानी हड्डियों और कंकाल संरचना और इंटरनल मेडिसिन में विशेषज्ञता हासिल है।

अस्पतालों की व्यवस्था

बातों बातों में डॉक्टर संजीव ने बताया कि उन्होंने भारत में दिल्ली के एम्स, सफ़दरजंग और राम मनोहर लोहिया अस्पताल, पटना के पीएमसीएच और उत्तर प्रदेश के बस्ती ज़िले के अस्पतालों का दौरा किया है जहां पर मरीज़ों की बहुत अनदेखी होती है जबकि यहां पर ऐसा नहीं है, चीन में मरीज़ों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दी जाती हैं। सर्जरी के क्षेत्र में भी चीन को डॉक्टर संजीव ने बेहतर बताया और कहा कि भारत में अभी भी लैप्रोस्कोपिक शल्य क्रिया में शरीर में तीन छेद किये जाते हैं जबकि चीन में एक ही छेद से पूरा ऑपरेशन किया जाता है। इन सबके पीछे डॉक्टर साहब का मानना है कि चीन के पास पैसे की कमी नहीं है इसीलिये जब दुनिया के विकसित देशों में कोई तकनीक अपने शुरुआती चरण में होती है तब चीन उसका आयात कर लेता है और उसपर अपने तरीके से शोध करता है, कम्युनिस्ट देश होने के नाते चीन में सारे अस्पतालों को सरकार से फ़ंड मिलता है और यहां पर समय समय पर डॉक्टरों को दूसरे देशों में सीखने के लिये भेजा जाता है, जिसे वो बाद में वापस लौटकर अपने साथियों को सिखाते हैं और मरीज़ों का बेहतर तरीके से इलाज करते हैं।

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