टिप्पणी:आखिर कौन विश्व में दूसरों को धमकी दे रहा है?

2019-07-25 17:32:00

हाल ही में अमेरिका के एक सौ से अधिक चीन विरोधी व्यक्तियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पत्र भेजकर चीन पर विस्तारवाद को बढ़ावा देने और अपनी व्यापक राष्ट्रीय शक्ति से दूसरों को धमकी देने का आरोप लगाया। यह कथन समझने के लिये बिल्कुल मुश्किल है। पर अगर हम चीन की जगह लेकर अमेरिका बदलेंगे तो यह बात आसानी से समझ आएगी।

यह खुला पत्र अमेरिकी नौ सेना के एक सेवानिवृत अधिकारी ने लिखा। उन के समर्थकों में कुछ सेवानिवृत सैनिक और खुफिया कर्मचारी शामिल हुए हैं। वे लोग चीन-अमेरिका संबंधों की चर्चा में जिम्मेदार नहीं हैं।

हाल के कई वर्षों में विश्व की मुख्य सुरक्षा संकट घटनाओं के पीछे अमेरिका की छाया है। अमेरिका ने आतंकवाद के विरोध के बहाने से अफ़गानिस्तान, इराक से लड़ाई की, और सीरिया पर सैन्य हमला किया, जिनसे बड़े हताहत पैदा हुए, और यूरोपीय देशों में शरणार्थी संकट भी पैदा हुआ। वर्तमान की अमेरिका सरकार और सक्रिय रूप से एकपक्षीयवाद को मजबूत करती है। उदाहरण के लिये उसने येरूशलम को इजराइल की राजधानी मान लिया। खुले तौर पर संयुक्त राष्ट्र के संकल्प व अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की सहमति को रौदा। एक पक्ष से ईरान के नाभिकीय मामले के व्यापक समझौते से हटने के बाद मध्यपूर्व की स्थिति में तनाव पैदा किया आदि। इसलिये अमेरिका विश्व शांति का मुख्य विध्वंसक व वैश्विक उतार-चढ़ाव का स्रोत है।

उधर चीन इतिहास में एक शांति प्रेमी है। चीन प्रभुत्ववाद कभी नहीं करेगा, और हमेशा से विश्व शांति के निर्माता व रक्षक है। अब तक चीन ने कुल मिलाकर 37 हजार शांति रक्षकों को भेजा है, जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्यों में सबसे बड़ी है। संयुक्त राष्ट्र संघ चीन को शांति रक्षा कार्रवाई में एक महत्वपूर्ण तत्व व कुंजीभूत शक्ति मानता है।

चंद्रिमा

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