टिप्पणीः अमेरिका विश्व सहयोग विकास में बाधा है

2019-07-26 19:02:00

हाल में अमेरिका के सौ से अधिक चीन के खिलाफ़ तथाकथित कट्टरपंथियों ने एक खुला पत्र जारी कर कहा कि चीन ने आर्थिक हितों से अमेरिका के गठबंधन देशों तथा अन्य देशों को भुलावा दिया और वैश्विक प्रभाव का विस्तार किया। निसंदेह, यह दलील चीन का खंडन करने वाली कथनी है, जिससे चीन के आर्थिक शक्ति की मजबूती के प्रति कुछ अमेरिकियों की ईर्ष्या दिखती है। वास्तव में अमेरिका का एकतरफावाद और संरक्षणवाद ही विश्व के विभिन्न देशों के सहयोग व विकास की बाधा है।

इधर के सालों में अमेरिका ने अपने हितों के लिए बार बार टैरिफ़ की लाठी उठायी है और जगह जगह व्यापारी भित्ति की स्थापना की। विश्व बैंक द्वारा जून माह में जारी रिपोर्ट के मुताबिक अनुमान है कि विश्व व्यापार विकास दर केवल 2.6 प्रतिशत होगी, जो 2008 अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संकट के बाद न्यूतम स्तर होगा। साथ ही अमेरिका द्वारा अपनायी गयी वैज्ञानिक व तकनीक प्रभुत्ववादी मानव जाति के वैज्ञानिक व तकनीक विकास और सभ्यता व प्रगति को गहरा नुकसान पहुंचा रही है। उदाहरण के लिए 5जी तकनीक आदि उच्च विज्ञान व तकनीक में अग्रिम स्थान को छीनने के लिए अमेरिका ने राष्ट्रीय शक्ति का इस्तेमाल कर चीनी कारोबारों पर दबाव डाला और अनेक अमेरिकी कारोबारों के चीनी कारोबार के सहयोग को बंद करने की कोशिश की। किसी भी कीमत पर विश्व विज्ञान व तकनीक की प्रगति व विकास से रोकने की कोशिश सचमुच हालिया दुनिया में सब से बुरी मिसाल है।

अमेरिकन फर्स्ट की प्रभुत्ववादी विचारधारा से अमेरिका विश्व विकास घाटा को निरंतर बढ़ाता रहा है। एक जिम्मेदार बड़ा देश होने के नाते चीन का विकास खुद की जनता के सुन्दर जीवन की मांग को पूरा करने के साथ खुद के विकास को भी साकार करता है, साथ ही अन्य देशों व जनता को भी मदद देता है।

इधर के सालों में विश्व आर्थिक विकास पर चीन की योगदान दर क्रमशः 30 प्रतिशत से अधिक रहती है, जो विश्व के पहले स्थान पर रहा है। चीन के विशाल बाजार ने अंतरदेशीय कारोबारों के लिए प्रचुर लाभांश की तैयारी की है। चीन की मांग और निवेश ने विभिन्न देशों के लिए रोजगार के तमाम मौके दिए हैं।

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