टिप्पणीः खुद के मानवाधिकार रोग का इलाज करे अमेरिका

2019-07-27 20:02:00

चीनी मानवाधिकार अनुसंधान संस्था ने हाल में एक रिपोर्ट जारी कर कहा कि अमेरिकी विद्वानों के सर्वेक्षण और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में लम्बे अरसे से नस्लीय भेदभाव की समस्या मौजूद रही है। अमेरिकी राजनयिक मानवाधिकार को राजनीतिक माध्यमों के रूप में इस्तेमाल करते हैं।

लम्बे अरसे से मानवाधिकार हमेशा ही अमेरिका द्वारा दूसरे देशों के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप करने या दूसरे देशों पर दबाव डालने का प्रमुख हथियार है। जब अमेरिका किसी पर दबाव डालना चाहता है, तो तथाकथित मानवाधिकार रिपोर्ट जारी करता है और दूसरों देशों की मानवाधिकार स्थिति की निराधार निंदा करता है।

वास्तव में अमेरिका में मानवाधिकार की समस्या बहुत गंभीर रही है। अमेरिका में अल्पसंख्यक जातियों के बुनियादी मानवाधिकारों को बार बार रौंदा जाता है। रोजगार, वेतन, शिक्षा और जीवन आदि क्षेत्रों में अल्पसंख्यक जातियों का स्तर बहुत नीचा रहा है, और विधान क्षेत्र में उनके साथ गलत व्यवहार किया जाता है।

इस की चर्चा में भूतपूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि अमेरिका में भेदभाव अब भी जीवन में रहा है, जिसका गहरा असर रहा है।

अमेरिकी एफबीआई के आंकड़े बताते हैं कि 2017 में अमेरिका में नफरत की वजह से आपराधिक मामलों की संख्या में 2016 की तुलना में 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी आयी है। अफ्रीकी मूल के अमेरिकी और यहूदी धर्म के लोग इन घटनाओं के शिकार बनते हैं। इसे मद्देनजर अमेरिकी सरकार ने इसे रोकने के लिए कदम नहीं उठाये, इस के विपरीत निरंतर नस्लीय भेदभाव का प्रचार प्रसार करने की कोशिश की। उदाहरण के लिए अमेरिका सरकार ने अमेरिका-मैक्सिको की सीमा पर अलगाव दीवार का निर्माण करने का निर्णय लिया और गैरकानूनी आप्रवासियों को गिरफ्तार किया।

अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अमेरिका संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से हट गया, आप्रवासी समस्या के विश्व अनुबंध बनाने की प्रक्रिया से भी हटा, बाल अधिकार संधि और विकलांग अधिकार संधि आदि संधियों की पुष्टि को अस्वीकार किया और विश्व मानवाधिकार गारंटी कार्य को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया में बाधा डाली।

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