चीन-अमेरिका व्यापार वार्ता के लिए लगातार दबाव बनाने का कोई औचित्य नहीं

2019-07-31 11:02:01

30 जुलाई को चीन के शांघाई शहर में 12वें चरण की चीन-अमेरिका व्यापार वार्ता शुरू हुई, लेकिन इसी दौरान अमेरिका में कुछ लोगों का कहना है कि अमेरिका के अधिक कर वसुली के सामने चीन ने घुटने टेक दिये हैं, और अमेरिका को लाभ मिला है। उनका यह भी कहना है कि चीन आखिरी समय तक अपने हित के लिए समझौते में संशोधन करने की मांग करता रहा है। अमेरिका में कुछ लोगों ने ऐसा कहकर वार्ता के प्रति ईमानदारी नहीं दिखायी जो कि ओसाका शिखर वार्ता में प्राप्त सहमतियों का सरासर उल्लंघन है। उनका मकसद है कि चीन पर लगातार दबाव बनाये जाने से वार्ता में अधिक लाभ मिलेगा।

बीते एक साल में चीन और अमेरिका के बीच दस से अधिक चरणों की वार्ता में अनेक मुद्दों पर सहमतियां हुईं, लेकिन अमेरिका ने कई बार अत्यधिक दबाव बनाकर चीन की प्रभुसत्ता और प्रतिष्ठा को चोट पहुंचाने वाली मांग पेश की। जून माह के अंत में चीन और अमेरिका दोनों देशों के राष्ट्रपति जापान के ओसाका शहर में समानता और एक दूसरे का समादर करने के सिद्धांत पर व्यापार वार्ता की बहाली पर सहमति जताते हुए व्यापार घर्षण पर वार्ता को सही दिशा में वापस लेकर आये। इसके बाद लोगों ने देखा कि चीन ने अमेरिका से कई लाखों टन सोयाबीन खरीदा, जबकि अमेरिका ने चीन के 110 वर्ग के मालों पर अधिक कर वसुली को कम किया। ऐसे कदम से दोनों पक्षों की ओसाका सहमति संपन्न करने की इच्छा साबित हुई और लोग भी 12वें चरण की चीन-अमेरिका व्यापार वार्ता के परिणाम की प्रतीक्षा में हैं।

लेकिन इसी दौरान अमेरिका में कुछ लोगों ने चीन पर निरंतर दबाव बनाना चाहा, पर यह चीन के लिए बेअसर है। पिछले कुछ समय के तथ्यों पर नजर डालें तो देखेंगे कि व्यापार युद्ध में कोई विजेता नहीं होता। इसमें किसी की हार और किसी की जीत नहीं होती। इस वर्ष के पूर्वार्द्ध में चीनी अर्थव्यवस्था स्थिर रहने के साथ-साथ आगे बढ़ी है। चीन का समष्टि अर्थशास्त्र सूचकांक उचित दायरे में है। उधर इस वर्ष की दूसरी तिमाही में अमेरिका की जीडीपी वृद्धि दर 2.1 प्रतिशत पर बनी हुई है जो पहली तिमाही की 3.1 प्रतिशत से कम रही। अमेरिका में विनिर्माण उद्योग की स्थितियां और खराब हैं। औद्योगिक उत्पादन में "तकनीकी मंदी" नजर आ रही है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार इस वर्ष अमेरिका की वृद्धि दर 2.9 प्रतिशत तक रहेगी जबकि अगले वर्ष यह दर गिरकर 1.9 प्रतिशत तक चली जाएगी।

चीन-अमेरिका व्यापार वार्ता में सकारात्मक परिणाम निकलने के लिए ओसाका सहमति का कार्यान्वयन करना चाहिये और दोनों पक्षों को समानता और एक दूसरे का समादर करने पर टिके रहना चाहिये। अत्यधिक दबाव डालने का का कोई औचित्य नहीं है और न ही कोई अच्छा परिणाम निकलेगा।

( हूमिन )

 

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