टिप्पणीः कृषि उत्पादों के व्यापार में बाधा पैदा होने की जिम्मेदारी अमेरिका की

2019-08-06 11:32:00

चूंकि हाल में अमेरिका ने चीन से आयातित 3 खरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के उत्पादों पर 10 प्रतिशत टैरिफ़ बढ़ाने का एलान किया और चीन-अमेरिका ओसाका शिखर भेंटवार्ता में प्राप्त सहमति का गंभीर उल्लंघन किया, चीनी राज्य परिषद के सीमा शुल्क आयोग 3 अगस्त के बाद खरीदे जाने वाले अमेरिकी कृषि उत्पादों पर टैरिफ़ बढ़ाने पर भी विचार कर रहा है। चीन के संबंधित कारोबारों ने अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीदारी को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है।

यह चीन द्वारा अमेरिका की टैरिफ़ लाठी उठाने के खिलाफ़ उठाया गया जरूरी कदम है। कृषि क्षेत्र में चीन और अमेरिका की मजबूत आपूर्ति है, इसलिए कृषि उत्पादों का व्यापार करना दोनों पक्षों के समान हितों से मेल खाता है। चीन और अमेरिका के नेताओं की ओसाका शिखर वार्ता के बाद चीन ने घरेलू मांग और बाजार सिद्धांत के मुताबिक अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीदारी में अनेक प्रगतियां हासिल कीं। ओसाका वार्ता के बाद जुलाई के अंत तक कुल 22.7 लाख टन अमेरिकी सोयाबीन को चीन में भेजा गया है। इस के अलावा 2 अगस्त तक चीन ने अमेरिका से सूखी घास, गेहूं, कपास, सुअर मांस, दुग्ध उत्पाद, फल आदि कृषि उत्पादों को खरीदा है। चीन ने यथार्थ कार्यवाइयों से ओसाका भेंटवार्ता की सहमति का कार्यान्वयन किया और सहयोग की सदिच्छा प्रकट की। लेकिन अमेरिका ने अपने वचन का पालन न कर चीन के खिलाफ फिर एक बार टैरिफ की लाठी उठायी। इसने चीन और अमेरिका के बीच कृषि उत्पादों के व्यापार की आवश्यक स्थितियों को बर्बाद किया है। चीन ने विविश होकर तदनुरूप कदम उठाया है, जिसका मकसद देश की प्रतिष्ठा और खुद के अधिकार की रक्षा करना है। साथ ही यह भी स्पष्ट है कि किसी भी तरीके का दबाव चीन के लिए काम नहीं करेगा। चीन जवाबी कार्यवाइयां ज़रूर करेगा।

चीन विश्व में कृषि उत्पादों का सबसे बड़ा आयातक देश है, जबकि अमेरिका विश्व में कृषि उत्पादों का सबसे बड़ा निर्यातक देश है। कृषि उत्पादों का व्यापार चीन-अमेरिका व्यापारिक संबंधों में अहम स्थान रखता है। इस बात की जिम्मेदारी बिलकुल अमेरिकी पक्ष पर है, इसलिए सभी परिणाम भी अमेरिका को झेलने होंगे।

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