टिप्पणीः विनिमय दर पर नियंत्रण की निंदा अमेरिका का दोहरा मापदंड

2019-08-09 14:31:02

अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने हाल में चीन को विनिमय दर पर नियंत्रण करने वाला देश घोषित किया। अमेरिका ने न केवल अपने बनाए आकलन के मापदंड का उल्लंघन किया है, बल्कि अमेरिका सरकार द्वारा कई बार फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को कम करने की कार्यवाई को नजरअंदाज किया। अमेरिका ने दोहरे मापदंड अपनाकर प्रतिद्विंदी पर प्रहार करने की साजिश भी की।

लम्बे अरसे से अमेरिका ने अमेरिकी डॉलर की अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा के स्थान के सहारे विनिमय दर को अमेरिकी प्रभुत्व की रक्षा करने का साधन बनाया। 1994 से चीन ने आरएमबी की विनिमय दर का सुधार करने लगा, जिसके बाद आरएमबी की विनिमय दर का बाजारीकरण निरंतर उन्नत होता रहा है। लेकिन अमेरिकी पक्ष के कुछ लोग बार बार दबाव डालकर आरएमबी की विनिमय दर के लचीलेपन को बढ़ाने की मांग करते रहे हैं। हाल में अमेरिका ने मनमाने ढंग से एकतरफावादी नीति अपनाकर चीन के खिलाफ व्यापारिक विवाद को तीव्र किया, जिससे वैश्विक वित्तीय बाजार में डांवाडोल आया है। लेकिन अमेरिका के कुछ लोग अपने द्वारा कहीं गयी बातों को भूल गए और चीन की निंदा की कि चीन ने विनिमय दर पर नियंत्रण किया।

विश्व की दूसरी बड़ी आर्थिक इकाई और जिम्मेदारा देश होने के नाते चीन हमेशा जी-20 शिखर सम्मेलन में दिये गये विनिमय दर संबंधी वचन का कड़ाई से पालन करता है और विनिमय दर के नीतिगत साधन से व्यापारिक विवाद का निपटारा भी नहीं करेगा। 2018 में अमेरिका द्वारा व्यापारिक विवाद छेड़ने के बाद अमेरिका ने बार बार दबाव डाला है। लेकिन चीन हमेशा ही प्रतिद्वंदी अवमूल्यन पर कायम रहा है। एक तरफ, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में चीन की प्रतिद्वंदी श्रेष्ठता विनिमय दर पर नियंत्रण करने से प्राप्त नहीं उत्पादों पर निर्भर होकर प्राप्त की जाती है। अनेक अमेरिकी आयात व्यापारियों के लिए चीनी उत्पाद अनिवार्य हैं। इस साल के पूर्वार्द्ध में अमेरिका के प्रति चीन के निर्यात में 2.6 प्रतिशत और अमेरिका से आयात रकम में 25.7 प्रतिशत की कमी आयी है। आयात निर्यात में फर्क से पता चलता है कि चीनी उत्पाद अनिवार्य हैं।

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