टिप्पणी: विनिमय दर का दुरुपयोग विश्व के लिए हानिकारक

2019-08-09 20:01:01

अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने हाल में चीन को "विनिमय दर में हेरफेर देश" के रूप में सूचीबद्ध किया जिससे बहुपक्षीय नियम का उल्लंघन किया गया है। अमेरिका के गैर-जिम्मेदारना कदम से सारी दुनिया को हानि पहुंचायी जाएगी।

वर्तमान में एकतरफावाद और संरक्षणवाद उभरते रहे हैं। विश्व भर के दायरे में आर्थिक मंदी होने का खतरा भी बढ़ा है। चीन और अमेरिका विश्व में सबसे बड़े दो अर्थतंत्र हैं और उनका जीडीपी विश्व का 40 प्रतिशत भाग बनता है। चीन-अमेरिका व्यापार से विश्व के आर्थिक विकास से जुड़ा हुआ है। पर पिछले साल से अमेरिका ने चुंगी के माध्यम से चीन को दबाने का प्रयास किया और विश्व के उपभोक्ता और निवेश पर भारी प्रभाव पड़ा है। हाल में अमेरिका ने चीन को "विनिमय दर में हेरफेर देश" के रूप में सूचीबद्ध किया जिससे न केवल द्विपक्षीय संबंधों पर प्रहार किया जाएगा, बल्कि विश्व वित्तीय बाजार में उथल-पुथल पैदा होगी।

अमेरिका की दूसरे देश को मनमाने ढंग से नामबद्ध करने की कार्रवाई से विश्व के दायरे में बुरा प्रभाव पैदा हो सकेगा। इससे आर्थिक विकास के वातावरण तथा अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा व्यवस्ता की स्थिरता को भी खतरे में डाला जाएगा। विश्व के आर्थिक विकास के इतिहास से यह पता चला है कि विनिमय दर में उतार-चढ़ाव होने से गंभीर परिणाम जन्म लेगा। जापानी मुद्रा यान के मूल्य में वृद्धि होने के कारण जापानी अर्थतंत्र की दीर्घकालीन मंदी हुई। अर्जेंटीणा मुद्रा की भारी गिरावट से इस देश के सरकारी विश्वास का खात्मा किया गया। इनसे यह जाहिर है कि किसी भी देश में विनिमय दर के परिवर्तन से इस देश के आर्थिक विकास पर गंभीर असर पड़ेगा।

चीन-अमेरिका व्यापार घर्षण की पृष्ठभूमि में अमेरिका में कुछ व्यक्तियों ने चीन को "विनिमय दर में हेरफेर देश" बताने के जरिये अधिक कर वसुली करना और चीनी अर्थतंत्र का दमन करना चाहा। और साथ ही उन्होंने फेड पर मौद्रिक नीति को शिथिल करने के लिए दबाव बनाया। लेकिन इन की चाल से अमेरिका के खुद हितों को क्षति पहुंचायी जाएगी। नवीनतम आंकड़े बताते हैं कि जुलाई माह में अमेरिका के गैर-कृषि विभागों में रोजगार मौके की संख्या में कटौती होने लगी है। विनिमय दर के सवाल पर चीन को तकलीफ दिलाने से अमेरिका में आर्थिक मंदी पैदा होने का खतरा और बढ़ेगा। अमेरिका में अधिकाधिक विश्लेषकों का मानना है कि आरएमबी की गिरावट अमेरिका के अधिक कर वसुली से उत्पन्न बाजार परिवर्तन का परिणाम है। इसके पीछे चीन सरकार की कोशिश नहीं है। चाहे वर्ष 1997 की एशियाई वित्त संकट है या वर्ष 2008 में हुई विश्व वित्त संकट और गत वर्ष से शुरू व्यापार घर्षण तक, चीन ने हमेशा बाजार पर आधारित विनिमय दर प्रणाली का पालन किया है और मुद्रा का प्रतिस्पर्धात्मक अवमूल्यन नहीं चुना। चीन ने अपनी कार्यवाही से विश्व अर्थतंत्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी उठायी है।

( हूमिन )

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