टिप्पणी:चीन व जापान को विश्व में ज्यादा सकारात्मक ऊर्जा डालना चाहिये

2019-08-12 19:31:00

हाल ही में चीन व जापान दोनों देशों के उप विदेश मंत्रियों ने जापान में नये चरण की चीन-जापान रणनीतिक वार्ता की अध्यक्षता की। सात वर्षों के बाद चीन व जापान ने फिर एक बार यह वार्ता व्यवस्था पुनः शुरू की है। दोनों पक्षों ने इस बात की पुष्टि की कि वे सक्रिय रूप से चीन व जापान के नेताओं द्वारा ओसाका भेंट में प्राप्त महत्वपूर्ण सहमति को लागू करेंगे, नये युग से मेल खाने वाले चीन-जापान संबंधों की स्थापना करने की कोशिश करेंगे। इससे जाहिर होता है कि कई मोड़ों से गुजरने वाले चीन-जापान संबंध अब बेहतर हो रहे हैं, और ज्यादा से ज्यादा सकारात्मक संदेश भी भेजा जा रहा है।

चीन-जापान रणनीतिक वार्ता मई 2005 में शुरू हुई थी। जून 2012 तक कुल मिलाकर 13 बार इसका आयोजन किया गया था। जिसने दोनों देशों के बीच राजनीतिक आपसी विश्वास को मजबूत करने, रणनीतिक आपसी लाभदायक संबंधों की पुष्टि व बढ़ावा देने के लिये महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। लेकिन बाद में जापान ने सिलसिलेवार गलत कथन व कार्रवाई की। इसलिये रणनीतिक वार्ता रुक गयी।

हाल के कई वर्षों में विश्व की स्थिति बदल रही है। एक तरफ अमेरिका एकपक्षवाद व संरक्षणवाद को बढ़ावा देता है, और विश्व के दायरे में व्यापारिक संघर्ष पैदा करता है। जिससे विश्व की अर्थव्यवस्था को बड़े खतरे का सामना करना पड़ा। जापान ने भी अमेरिका से आए बड़ा व्यापारिक दबाव को महसूस किया। दूसरे पक्ष में चीन व जापान पड़ोसी देश हैं। दोनों के बीच आर्थिक संपूरकता बहुत शक्तिशाली है। दोनों देशों के लाभ एक दूसरे से जुड़ते हैं। वर्ष 2007 से चीन लगातार जापान का सब से बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा है। ऐसी स्थिति में चीन-जापान संबंध निरंतर रूप से बेहतर हो रहे हैं। भविष्य में दोनों पक्षों को एक दूसरे पर प्रकाश डालना चाहिये, और चीन-जापान संबंधों को विश्व शांति की रक्षा और समान विकास को मजबूत करने का महत्वपूर्ण सकारात्मक तत्व बनाना चाहिये।

चंद्रिमा

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