पेइचिंग अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला : पुस्तकों के माध्यम से आदान-प्रदान का मंच

2019-08-22 14:33:00

26वां पेइचिंग अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला 21 से 25 अगस्त तक आयोजित हो रहा है। 95 देशों और क्षेत्रों से आए 2600 से अधिक देसी-विदेशी प्रकाशक भाग ले रहे हैं। जहां 3 लाख से अधिक तरह की प्रकाशित नई पुस्तकें प्रदर्शित की जा रही हैं। पारंपरिक पुस्तक प्रदर्शनी के अलावा, मेले के दौरान एक हज़ार से अधिक रंग-बिरंगी सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी। यह मेला देसी-विदेशी प्रकाशकों के बीच आदान-प्रदान और सहयोग का मंच बन गया है।

मौजूदा पेइचिंग अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले में भागीदारी प्रकाशक 95 देशों और क्षेत्रों से आए हैं, 1600 से अधिक विदेशी प्रकाशन संस्थाएं हिस्सा ले रही हैं। विदेशी प्रकाशकों का अनुपात 60 प्रतिशत से ज्यादा है। भारत के सपना प्रकाशन गृह के प्रमुख अमन चावला ने संवाददाता से कहा कि पेइचिंग अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले ने एक अच्छा मंच प्रदान किया।

“यह एकस्पो बहुत अच्छा है। भारत की बाल पुस्तकों को चीनी प्रकाशक बहुत पसंद कर रहे हैं। मुझे लगता है कि इस मंच के माध्यम से अच्छी भारतीय पुस्तकों को चीनी प्रकाशकों को बेचा जा सकता है। एकस्पो ने हमें अच्छा मौका दिया है। इसी दौरान हमने भारतीय पुस्तकों के बारे में विचार-विमर्श किया। आशा है कि भविष्य में हम चीनी प्रकाशकों के साथ सहयोग कर सकेंगे।” अमन चावला ने बात कही।

पेइचिंग अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला का इतिहास 33 वर्ष पुराना है, जो अब तक विश्व में दूसरा बड़ा पुस्तक मेला बन गया है। इधर के सालों में पेइचिंग अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला चीनी पुस्तकों के विदेशों में प्रवेश करने को प्रोत्साहित करता है। अधिकाधिक चीनी प्रकाशन संस्थाएं सक्रिय रूप से अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में जुटी हुई हैं। मौजूदा एकस्पो में भाग लेने वाले चीनी प्रकाशन संस्थाओं ने खास तौर पर अपने-अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोग के फलों को दिखाने वाले प्रदर्शन क्षेत्र स्थापित किया। चीनी विदेशी भाषा प्रकाशन ब्यूरो के उप प्रधान लू छाईरोंग ने संवाददाता को बताया कि विदेशी भाषा प्रकाशन ब्यूरो अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन जगत में सहयोग के लिए सक्रिय रूप से खोजता है। लू का कहना है:“अभी तक हमने विदेशों के उन्मुख चीन के विषय वाले करीब 50 संपादकीय विभाग स्थापित किए। संबंधित देशों के साथ चीन के विषय वाले चीनी पुस्तकों का समान रूप से संपादन, प्रकाशन और वितरण करते हैं। पहली खेप वाली 300 से अधिक पुस्तकें हो चुकी हैं, जिनकी बिक्री अभी दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में हो रही है और जिन्हें स्थानीय पाठकों का स्वागत मिला। इसके साथ ही हम विदेशों में चीनी पुस्तकों के विस्तार वाले कार्य पर जोर देते हैं। 10 देशों में चीनी पुस्तक केंद्र की स्थापना की गई। सबसे पहले पोलैंड में दुनिया भर में पहला पुस्तक केंद्र स्थापित हुआ, फिर पेरू, थाईलैंड, स्विट्जरलैंड, कंबोडिया और ईरान आदि। हम तरह-तरह के उपायों से अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन जगत के साथ सहयोग कर रहे हैं। लक्ष्य है कि चीनी पुस्तकों को विश्व के ज्यादा से ज्यादा स्थलों तक पहुंचाया जा सकेगा।”

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