"पैन-तृतीय ध्रुव पर्यावरणीय मूल्यांकन तथा हिंदू कुश-हिमालयन (एचकेएच) क्षेत्र उच्च स्तरीय नीति संगोष्ठी" आयोजित

2019-08-22 15:01:01

"पैन-तृतीय ध्रुव पर्यावरणीय मूल्यांकन तथा हिंदू कुश-हिमालयन (एचकेएच) क्षेत्र उच्च स्तरीय नीति संगोष्ठी" 20 अगस्त को चीनी विज्ञान अकादमी के तहत विश्वविद्यालय में आयोजित हुई, जिसमें एचकेएच क्षेत्र में पर्यावरण और जलवालु के परिवर्तन तथा अनवरत विकास के विषयों पर विचार विमर्श किया गया।

3500 किलोमीटर लम्बा हिंदू कुश-हिमालयन पर्वत अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत, चीन, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और म्यांमार कुल आठ देशों को पार करता है। संगोष्ठी में पारित एक रिपोर्ट के मुताबिक मानव कारक और जलवायु परिवर्तन के कारण से इस क्षेत्र के जन जीवन, जैव विविधता और जलीय व्यवस्था को गंभीर खतरे में डाला गया हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर वर्ष 2100 तक हिन्दू कुश-हिमालयी क्षेत्र में तापमान 1.8 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाए, तो इस क्षेत्र में एक तिहाई ग्लेशियर पिघलेंगे, जिससे इस क्षेत्र के लाखों करोड़ों लोगों के जीवन और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

22 देशों के 185 संगठनों के 350 विशेषज्ञों और विद्वानों ने इस रिपोर्ट के संशोधन में भाग लिया। रिपोर्ट ने हिन्दू कुश-हिमालयी क्षेत्र में जन जीवन में सुधार लाने के लिए एक्शन रोड मैप तैयार किया और विभिन्न पक्षों से तुरंत ही सहयोग करने की अपील की।

( हूमिन )  

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