मतभेदों में जी 7 शिखर सम्मेलन का उद्घाटन

2019-08-25 15:01:00

24 अगस्त को जी 7 शिखर सम्मेलन फ्रांस के दक्षिण स्थित बियारित्ज में उद्घाटित हुआ। व्यापार, जलवायु परिवर्तन और ईरानी परमाणु मुद्दे जैसे सवालों पर मतभेद होने के कारण इस शिखर सम्मेलन के परिणाम आशावान नहीं हैं।

दो दिवसीय शिखर सम्मेलन का विषय है "असमानता से संघर्ष"। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमेनुअल मैक्रो ने मिस्र, दक्षिण अफ्रीका, बुर्किना फासो, सेनेगल और रवांडा पांच अफ्रीकी साझेदार देशों तथा भारत, ऑस्ट्रेलिया, चिली और स्पेन जैसे देशों के नेताओं को भी आमंत्रित किया। संयुक्त राष्ट्र, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक, अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन, आर्थिक सहयोग और विकास संगठन, और अफ्रीकी संघ, अफ्रीकी विकास बैंक के प्रतिनिधि भी सम्मेलन में शामिल हुए। और राष्ट्रपति मैक्रो के अनुसार शिखर सम्मेलन की समाप्ति पर संयुक्त विज्ञप्ति जारी नहीं की जाएगी, जो जी 7 के इतिहास में अभूतपूर्व है।

विश्लेषकों का मानना है कि जी 7 के सदस्यों के बीच ईरान परमाणु समझौता, विश्व व्यापार, डिजिटल सेवा कर और जलवायु परिवर्तन के सवालों पर गंभीर मतभेद मौजूद हैं। दूसरे देशों की चिन्ता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प शिखर सम्मेलन में पिछले साल के जैसे दिक्कत पैदा कर सकते हैं। राष्ट्रपति मैक्रोन ने 24 अगस्त को राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ लंच करते हुए उक्त सवालों पर विचार-विमर्श किया। खबर है कि दोनों के बीच डिजिटल सेवा कर, व्यापार और जलवायु परिवर्तन के सवाल पर मतभेद बने रहे। जिससे लोकमतों की चिन्ता और बढ़ी है।

यूरोपीय देशों के भीतर ब्रेक्सिट और जी 7 में रूस की एक बार फिर भागीदारी के सवालों पर मतभेद भी मौजूद है। ब्रिटेन ने औपचारिक तौर पर यूरोपीय संघ के समक्ष ब्रिक्सिट वार्ता की शर्तें प्रस्तुत कीं। ब्रिटेन के नये प्रधानमंत्री ने जर्मनी और फ्रांस के नेताओं के साथ इस बात पर विचार विमर्श किया। जी 7 शिखर सम्मेलन से पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने निमंत्रण पर फ्रांस की यात्रा की। लेकिन जी 7 में रूस की सदस्यता की बहाली पर फिर भी संदेह है।

( हूमिन )

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