भारतीय अखबार द हिन्दू में चीनी राजदूत का लेख प्रकाशित

2019-08-25 16:31:01

24 अगस्त को भारत स्थित चीनी राजदूत सुन वेई तुंग ने भारत के अख़बार द हिन्दू में अपना लेख "सिल्क रोड पर्ल से चीन-भारतीय सभ्यता विनिमय पर प्रकाश" जारी कर कहा कि ड्वेन ह्वांग को चीन और भारत दो प्राचीन सभ्यताओं के बीच आदान-प्रदान का "सिल्क रोड पर्ल" माना जाता है। आशा है कि दोनों पक्षों के बीच एक दूसरे का समादर करने और सद्भावना से मिलने का नया अध्याय जुड़ेगा।

लेख में कहा गया है कि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने हाल ही में पश्चिमी चीन स्थित तीर्थस्थल ड्वेन ह्वांग का दौरा किया। पर ड्वेन ह्वांग प्राचीन काल में चीन और भारत के बीच आदान प्रदान का महत्वपूर्ण पड़ाव था। वहां स्थित 1650 साल पुरानी मोगाओ गुफा, चीन में सबसे प्रचुर और कलात्मक रूप से सुंदर बौद्ध कला अवशेष माना जाता है। इसमें कुल 735 गुफाएं, 45 हजार वर्ग मीटर भित्तिचित्र और 2000 रंगीन मूर्तियां सुरक्षित हैं। ड्वेन ह्वांग का दौरा करते हुए मेरी आंखों में भारत में मशहूर अजंता और अलोरा गुफाएँ नजर आती हैं। इन की बौद्ध मूर्तियों और भित्तिचित्रों में चीन और भारत के बीच ऐतिहासिक व सांस्कृतिक संबंध दिखते हैं। चौथी और छठी शताब्दी की ड्वेन ह्वांग गुफाओं में लोग भारतीय शैली की मूर्तियां देख सकते हैं। ड्वेन ह्वांग की भित्तिचित्रों में अकसर दिखते रहे जो यक्षी हैं, वे भी भारत से आये हैं। और ड्वेन ह्वांग में बड़ी मात्रा के संस्कृत बौद्ध ग्रंथ तथा पत्ता शास्त्र भी संरक्षित हैं।

राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने कहा, "ड्वेन ह्वांग इतिहास में पूर्वी और पश्चिमी संस्कृतियों के आदान प्रदान का महत्वपूर्ण केंद्र था। और भिन्न भिन्न संस्कृतियाँ यहाँ एकत्र और मिश्रित होती रही थीं।" चीन के मशहूर सांस्कृतिक विद्वान ची श्यैन लीन ने कहा कि प्राचीन काल में चीन, भारत, ग्रीस और इस्लाम इन चार सांस्कृतिक प्रणालियों का ड्वेन ह्वांग में मिश्रण हुआ था। और प्राचीन काल में विभिन्न देशों के अनगिनत दूत, व्यापारी, ऊंट टीम, साधु और विद्वान सिल्क रोड पर आदान प्रदान करते थे। चीन और भारत ने सिल्क रोड तथा समुद्री सिल्क रोड के जरिये घनिष्ठ तौर पर व्यापारिक और सांस्कृतिक आदान प्रदान किया था। चीन की कागज़ बनाने की कला, रेशम, चीनी मिट्टी के बरतन और चाय भारत में प्रविष्ट हुए थे, जबकि भारतीय गीत-नृत्य, खगोल विज्ञान, वास्तुकला और मसाले आदि चीन पहुंचे थे। सिल्क रोड की भावना खुलेपन, संचार और सहिष्णुता की भावना है। खुलेपन के बिना कोई प्रगति और विकास होना भी असंभव है। जो आज के दिन भी बरकरार है।

लेख के अंत में कहा गया है कि चीन और भारत के विदेश मंत्रियों ने कुछ समय पूर्व पेइचिंग में वार्ता की। दोनों ने इस बात पर सहमत हुए कि वे और ज्यादा सांस्कृतिक आदान प्रदान आयोजित करेंगे और दोनों के बीच संबंधों के विकास के लिए मजबूत नींव डालेंगे।

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