चीन का तिब्बती संस्कृति दल स्वीडन के दौरे पर

2019-09-28 15:02:00

राज्य परिषद सूचना कार्यालय द्वारा आयोजित, चीन के तिब्बत विज्ञान अनुसंधान केंद्र के इतिहास संस्थान के प्रमुख चांग यून के नेतृत्व में चीनी तिब्बत सांस्कृतिक आदान-प्रदान दल ने 25 से 26 सितंबर तक स्वीडन का दौरा किया।

यात्रा के दौरान दल ने स्वीडन के विदेश मंत्रालय के अफसरों और स्वीडन के सुरक्षा व विकास अनुसंधान शाला के विद्वानों के साथ विचार विमर्श किया। और स्टॉकहोम विश्वविद्यालय के विद्वानों के साथ चर्चा की। चर्चा के दौरान चांग ने कहा कि इस साल तिब्बत में लोकतंत्रिक रूपांतर की 60वीं जयंती है। तिब्बत में किया गया लोकतंत्रिक रूपांतर न सिर्फ चीन, बल्कि विश्व के मानवाधिकार विकास के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है। चीन में निरंतर प्रगति हो रही है। आर्थिक विकास होने के चलते मानवाधिकार का भी लगातार विकास होता रहा है। लेकिन चीन आज भी विकासशील देश है और तिब्बत चीन में आपेक्षाकृत पिछड़ा हुआ क्षेत्र है। तिब्बती जनता के लिए विकास का अधिकार सबसे महत्वपूर्ण मानवाधिकार है। विभिन्न देशों के इतिहास, सांस्कृतिक परंपरा, जनसंख्या और ठोस स्थितियां भी अलग अलग हैं। इसलिए मानवाधिकारों की चर्चा करते समय ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वास्तविकता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

चांग ने कहा कि तिब्बत में पारंपरिक संस्कृति के संरक्षण में उल्लेखनीय प्रगति हासिल हो चुकी है। धार्मिक स्वतंत्रता की कानूनी गारंटी की गयी है। पश्चिमी देशों की सरकारों और मीडिया को तिब्बत में मानवाधिकार विकास की समग्र स्थिति पर ध्यान देना चाहिये। लोकतंत्रिक रूपांतर करने के इधर के 60 सालों में तिब्बती जनता के जीवन में भारी परिवर्तन आया है। तिब्बती लोगों में शिक्षित जनसंख्या का अनुपात 5 प्रतिशत से बढ़कर 100 प्रतिशत तक पहुंच गया है। औसत जीवन प्रत्याशा भी 35.5 वर्ष से बढ़कर 70.6 वर्ष तक जा पहुंची है। चीन की वास्तविकता के आधार पर तिब्बत के विकास को देखना चाहिये, अन्यथा गलत समझ बनेगी। 

( हूमिन )

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