लघु टिप्पणी : बौधिक संपदा अधिकार के संरक्षण से चीन में उच्च गुणवत्ता वाले विकास को मिली प्रेरणा

2019-10-03 17:02:00

न्यूज़ पृष्ठभूमि : साल 1980 में चीन ने औपचारिक तौर पर विश्व बौद्धिक संपदा अधिकार संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) में भाग लिया। इसके बाद क्रमशः पेटेंट, ट्रेडमार्क, कॉपीराइट आदि क्षेत्रों में बौद्धिक संपदा अधिकार से संबंधित कुछ अंतरराष्ट्रीय संधियों में हिस्सा लिया। साल 2018 में चीनी देसी-विदेशी पेटेंट आवेदन की संख्या 42 लाख से अधिक हो गयी, आविष्कार पेटेंट की आवेदन संख्या लगातार 8 सालों में विश्व के पहले स्थान पर रही। विश्व बौद्धिक संपदा अधिकार संगठन के महानिदेशक फ्रांसिस गुर्री ने कहा कि चीन ने साल 1984 में पहला पेटेंट कानून पारित किया, 30-40 सालों के कम समय में चीन में विश्व में पहली श्रेणी वाली बौद्धिक संपदा अधिकार व्यवस्था स्थापित हो चुकी है। बौद्धिक संपदा अधिकार के संरक्षण क्षेत्र में चीन द्वारा प्राप्त उपलब्धियां प्रशंसनीय है।

सीएमजी टिप्पणी : चीन लगातार बौद्धिक संपदा अधिकार की व्यवस्था के निर्माण को आगे बढ़ाता है और बौद्धिक संपदा अधिकार के संरक्षण को मजबूत करता है। इससे न केवल सृजनात्मक विकास, वैज्ञानिक तकनीकी प्रगति का लगातार संवर्धन मिला, बल्कि विदेशी पूंजी वाले निगमों के कानूनी बौद्धिक संपदा अधिकार का कारगर संरक्षण किया गया। इसके साथ ही देश भर में नागरिकों के नवाचार की सक्रियता भी बढ़ गई। “चीन के निर्माण” से “चीन के नवाचार” तक, “चीन की गति” से “चीन की गुणवत्ता” तक, “चीन के उत्पाद” से “चीन के ब्रांड” तक परिवर्तित हुआ। वर्तमान में चीन बौद्धिक संपदा अधिकार के अंतरराष्ट्रीय नियम का पालन करने वाले से आगे बढ़ाने वाले यहां तक कि नेतृत्व करने वाले तक बदल रहा है। चीन बौद्धिक संपदा अधिकार के अंतरराष्ट्रीय नियम का दृढ़ रक्षक, महत्वपूर्ण भागीदार और सक्रिय निर्माता बन चुका है। बौद्धिक संपदा अधिकार चीन की उच्च गुणवत्ता वाली विकास प्रक्रिया में ज्यादा गतिज ऊर्जा छोड़गा।

(श्याओ थांग)

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