मोदी-शी की वार्ता से नई उम्मीदें

2019-10-10 16:31:10

लेखक : अखिल पाराशर

हालिया समय में, भारत और चीन ने बिगड़ते आपसी रिश्तों को संभालने और संबंधों की नई कहानी गढ़ने का प्रयास किया है। पिछले साल अप्रैल में चीन के वुहान शहर में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच हुई पहली अनौपचारिक शिखर वार्ता में यह साफ़ देखा भी गया है। इस अनौपचारिक वार्ता ने दोनों देशों के बीच नई दोस्ती को जन्म दिया, जिसे 'वुहान स्पिरिट' के नाम से भी जाना जाता है। इस दोस्ती को जारी रखते हुए चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग 11 अक्टूबर को भारत दौरे पर आ रहे हैं और तमिलनाडु के पास महाबलीपुरम में दोनों राष्ट्राध्यक्षों की मुलाकात होगी। यह वुहान के बाद दोनों देशों की दूसरी अनौपचारिक शिखर वार्ता है।

माना जा रहा है कि इस दूसरी अनौपचारिक शिखर वार्ता का स्वभाव पहले की तरह ही होगा जिसमें कोई विशिष्ट एजेंडा नहीं है। किसी भी विशिष्ट एजेंडा के न होने से दोनों देशों के शीर्ष नेता क्षेत्रीय और वैश्विक मामलों पर खुलकर बातचीत कर सकते हैं और वार्ता के बाद किसी समझौते या घोषणा का दबाव नहीं होगा। लिहाज़ा नेताओं के पास सीधे संवाद के जरिए उन मुद्दों पर बात करने का मौका होगा जो दोनों देशों के रिश्तों में अकसर मतभेद के मौके देते हैं।

इसके अलावा, दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों के पास द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक व्यापक रास्ते की तलाश करने का मौका होगा और दोनों देशों के बीच मतभेदों की सिलवटें मिटाने का मौका भी हासिल होगा। इस दौरान भारत का प्रयास रहेगा कि सीमा विवाद को सुलझाने की दिशा में रफ्तार बढ़ाने के साथ ही द्विपक्षीय व्यापार घाटे की खाई पाटने के लिए नई कवायद शुरू करने पर सहमति बने।

दरअसल, चीन के वुहान शहर में हुए पहली अनौपचारिक शिखर वार्ता की तरह ही यहां भी दोनों नेताओं को एक-दूसरे के साथ अकेले समय बिताने के कई मौके मिलेंगे। उस दौरान प्रधानमंत्री मोदी चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग को महाबलीपुरम के समुद्र-तट के मन्दिर (शोर टेम्पल), जिसका संबंध 8वीं शताब्दी से है, का दीदार भी करवाएंगे। इस ऐतिहासिक स्थल का भ्रमण करवाकर, प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति शी को याद दिलाएंगे कि न केवल भारत चीन की तरह एक प्राचीन सभ्यता वाला देश है, बल्कि यह भी है कि दोनों ही देश पश्चिम में पैदा हुई औद्योगिक क्रांति से पहले दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण अर्थव्यवस्थाएं थीं।

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