टिप्पणीः चीन और भारत रणनीतिक दृष्टि से दो देशों के संबंधों के सौ साल के विकास का कार्यकर्म बना रहे हैं

2019-10-13 01:01:00

चीन और भारत के नेताओं की दूसरी अनौपचारिक शिखर बैठक 11 से 12 अक्टूबर तक दक्षिण भारत के चेन्नई में आयोजित हुई। द्विपक्षीय संबंधों और समान चिंता वाले अंतरराष्ट्रीय व क्षेत्रीय सवालों पर चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने ईमानदारी और गहन रूप से रायों का आदान प्रदान किया। दोनों पक्षों का समान विचार है कि चीन और भारत एक दूसरे का सम्मान कर एक दूसरे से सीखना और हाथों में हाथ मिलाकर समान विकास व समृद्धि पूरा करना चाहिए ताकि चीन और भारत दोनों महान सभ्यता वाले देशों का पुनरुत्थान किया जाए।

पिछले साल वुहान में अनौपचारिक शिखर बैठक का अच्छा माहौल इस बार बना रहा। भारतीय पक्ष ने चीनी राष्ट्रपति का भव्य और जोशपूर्ण सत्कार किया। प्रधान मंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने एक हजार से अधिक प्राचीन सांस्कृतिक धरोहरों का दौरा किया, जिस से जाहिर है कि दोनों पक्ष इतिहास से बुद्धिमत्ता सीखकर सहयोग मजबूत बनाना चाहते हैं।

दूसरी अनौपचारिक शिखर बैठक में दोनों नेताओं ने व्यापक मुद्दों पर गहन विचार किया, जिस ने पारस्परिक मित्रता मजबूत की और रणनीतिक दृष्टि से द्विपक्षीय संबंधों के भावी विकास के लिए दिशा दिखायी।

पहला, दोनों नेताओं के विचार में चीन और भारत सही रूप से एक दूसरे के विकास को देखकर निरंतर पारस्परिक रणनीतिक विश्वास मजबूत करना चाहिए। दूसरा, चीन और भारत के बीच आर्थिक व व्यापारिक सहयोग की बड़ी संभावनाएं हैं। तीसरा, दोनों नेताओं ने दो देशों की राजनयिक संबंधों की 70वीं वर्षगांठ का अवसर पकड़ कर अधिक सांस्कृतिक आदान प्रदान और लोगों के बीच आवाजाही बढ़ाने का फैसला किया। इस के अलावा दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मामलों में समंव्य व सहयोग मजबूत बनाने का संकल्प व्यक्त किया।

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