टिप्पणी : ट्रम्प के शासन काल में अमेरिका-यूरोप ढांचागत चोट का इलाज नहीं

2018-08-03 17:32:08

ऐसी स्थिति होने के बावजूद इस दौरान अमेरिका और यूरोप के बीच फिर भी सहयोग और समन्वय बना रहा। उन्होंने साथ-साथ कोसोवो युद्ध छेड़ा और लीबिया के खिलाफ़ सैन्य आक्रमण किया। अमेरिका और यूरोपीय संघ, जर्मनी तथा फ्रांस जैसे बड़े देशों के बीच आदान-प्रदान और विचार-विमर्श कायम हुए। नाटो भी यूरोपीय संघ का ख्याल रखता है। लेकिन अमेरिका और यूरोप के बीच हमेशा से एक आधारभूत गांठ मौजूद है, यानी कि अमेरिका अपने यूरोपीय साथियों से खुद के रणनीतिक हितों के अनुकूल बात करने की मांग करता है। यूरोपीय संघ के पास अपने विचार और हित हैं, लेकिन अमेरिका की मांग के अनुसार बात करने में असक्षम है। इस तरह दोनों पक्ष साथी हैं या प्रतिद्वंद्वी, एक दूसरे पर संदेह करते हैं।

तीसरा, ट्रम्प की नीति से अमेरिका-यूरोप संबंध में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। शासन करने के बाद पिछले एक साल से अधिक समय में ट्रम्प ने अशिष्ट एकतरफ़ावाद का प्रसार किया। उन्होंने अमेरिका के तंगी हितों और दृष्टि को मापदंड बनाकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग की सामान्य व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया। इसके साथ ही उन्होंने पारंपरिक अमेरिका-यूरोप को भी तोड़ा। ट्रम्प ने नई यूरोप विचारधारा अपनायी। उन्होंने यूरोप की एकता को अस्वीकार किया और खुले आम यूरोपीय देशों को यूरोपीय संघ से हटने के लिए प्रोत्साहित किया। ट्रम्प का मानना है कि यूरोप ने अमेरिका की सुरक्षा रक्षा का सस्ते से प्रयोग किया। उन्होंने यूरोप से नाटो के सैन्य खर्च को बढ़ाने की मांग की और साथ ही शिकायत की कि यूरोप और अमेरिका के बीच आर्थिक व्यापारिक आवाजाही अन्याय है। उन्होंने यूरोप से कुछ प्राप्त करने की मांग की।

ऐसी पृष्ठभूमि में यूरोपीय संघ और उसके प्रमुख सदस्य देशों को छह महीनों से ज्यादा समय तक ट्रम्प के अत्याचारों से सताए गये। वे निराश और क्रोधित हुए और अमेरिका पर उनका विश्वास नहीं रहा।

न्यूज़ व्यापार पर्यटन बाल-महिला स्पेशल विश्व का आईना चीनी भाषा सीखें वीडियो फोटो गैलरी