(इंटरव्यू) चीन-भारत संबंध सुधारने में सांस्कृतिक कुटनीति का अहम रोल : डॉ. कर्ण सिंह

2018-09-10 20:12:00

डॉ. कर्ण सिंह सीआरआई संवाददाता को इन्टरव्यू देते हुए

भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद डॉ. कर्ण सिंह दार्शनिकों की वैश्विक बैठक में भाग लेने के लिए चीन की राजधानी पेइचिंग पहुंचे। उन्होंने 24वीं वर्ल्ड कांग्रेस ऑफ फिलॉसफी में शिरकत की, जिसका आयोजन इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ फिलॉसफिकल सोसाइटीज और पेकिंग यूनिवर्सिटी द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में लगभग 121 देशों और क्षेत्रों के लगभग 6,000 से अधिक दार्शनिकों और शिक्षाविदों ने भाग लिया।

भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के पूर्व अध्यक्ष डॉ. कर्ण सिंह ने वर्ल्ड कांग्रेस ऑफ फिलॉसफी के अलावा पेइचिंग स्थित भारतीय दूतावास में आयोजित एक भारतीय सांस्कृतिक कार्यक्रम में भी भाग लिया। उस दौरान उन्होंने सीआरआई हिन्दी सेवा को एक खास इंटरव्यू दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि भारत सांस्कृतिक दृष्टि से महाशक्ति देश रहा है। आज भारत के फिर से विश्व गुरू बनने के विषय पर चर्चाएं हो रही हैं।

आईसीसीआर के पूर्व अध्यक्ष डॉ. कर्ण सिंह ने कहा कि विश्व गुरू बनने के लिए आर्थिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक आयाम की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आसियान देशों की संस्कृति पर हिन्दू और बौद्ध धर्म का असर दिखता है।

जाने-माने भारतीय राजनेता, लेखक और कूटनीतिज्ञ डॉ. कर्ण सिंह ने इंटरव्यू में यह भी कहा कि सांस्कृतिक कुटनीति दो देशों के बीच संबंध बढ़ाने व प्रगाढ़ करने में बेहद अहम रोल निभाती है। इसे चीन और भारत के बीच संबंध में भी देखा जा सकता है। उन्होंने कहा, “चीन और भारत दोनों ही प्राचीन देश हैं, और दोनों ही देशों की संस्कृति बेहद समृद्ध हैं। यदि सांस्कृतिक संबंध बढ़ाया जाता है तो चीन और भारत के बीच संबंध अच्छे रहेंगे, जिसका मैं पूरी तरह से समर्थन करता हूं।”

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