टिप्पणीः “रीयरव्यू मिरर” में जी-20 शिखर सम्मेलन

2018-11-29 17:31:09

टिप्पणीः “रीयरव्यू मिरर” में जी-20 शिखर सम्मेलन

30 नवम्बर को जी-20 अर्जेंटीना शिखर सम्मेलन आयोजित होगा। यह इस साल विश्व में सब से महत्वपूर्ण घटना होगी।

2008 में विश्व वित्तीय संकट के बाद जी-20 शिखर सम्मेलन का तंत्र पैदा हुआ। अब इसे दस साल हो चुके हैं। हालिया वैश्विक आर्थिक मंदी और एकतरफावाद व संरक्षणवाद के उभरने की स्थिति में क्या जी-20 शिखर सम्मेलन फिर एक बार समन्वय व सहयोग का नेतृत्व करने की भूमिका अदा कर सकेगा। इसने दुनिया का ध्यान खींचा है।

जी-20 के सिलसिलेवार शिखर सम्मेलनों में चीन हमेशा ही बहुपक्षीयवाद का समर्थक रहा है। 2013 से चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने क्रमशः पाँच बार जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लिया। उन्होंने बार बार जोर दिया कि विभिन्न देशों को खुलेपन वाले विश्व अर्थतंत्र की रचना करनी चाहिए, व्यापार और पूंजी के संरक्षणवाद का विरोध करना चाहिए। साथ ही उन्होंने विभिन्न देशों से बहुपक्षीय व्यापारिक तंत्र की रक्षा करने, आपसी लाभ व समान उदार वाले वैश्विक मूल्य चेन की रचना करने और बड़ा विश्व बाजार की स्थापना करने की अपील भी की।

जी-20 शिखर सम्मेलन के पिछले दस सालों का सिंहावलोकन करते समय लोगों को गहरा अहसास हुआ कि इस साल के अर्जेंटीना शिखर सम्मेलन को यथार्थ कार्यवाइयां कर आपसी लाभ व साझी जीत की भावना की जरूरत है।

विश्व व्यापार संगठन के नये आंकड़े बताते हैं कि इस साल के मई से अक्तूबर माह तक जी-20 के सदस्यों के बीच अपनाये गये व्यापारिक प्रतिबंध के कदमों की संख्या 40 तक पहुंची, जो 4.81 खरब अमेरिकी डॉलर के व्यापारिक सौदों से संबंधित है। यह 2012 के बाद सब से ऊंची है।

कई विश्लेषकों ने चिंता प्रकट की कि जी-20 अर्जेंटीना शिखर सम्मेलन में इस साल के जी-7 शिखर सम्मेलन और एपेक अनौपचारिक शिखर सम्मेलन की तरह कोई भी परिणाम प्राप्त नहीं किया जा सकेगा।

जी-20 शिखर सम्मेलन एक तंत्र है, जबकि सभी समस्याओं का हल करने वाली दवा नहीं है। लेकिन चाहे जी-20 के सदस्यों के नेता सिर्फ मुलाकात करें और बातचीत, इस का मूल्यवान भी होता है। कारण यह है कि आपसी समझ बढ़ने से जोखिम कम होगा।

(साभार—चाइना रेडियो इंटरनेशनल ,पेइचिंग)

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