टिप्पणी:चीन में मानवाधिकार के विकास में नवाचार के चलते वास्तविक कार्यवाही भी है

2018-12-12 19:02:00

टिप्पणी:चीन में मानवाधिकार के विकास में नवाचार के चलते वास्तविक कार्यवाही भी है

चीनी राज्य परिषद ने 12 दिसंबर को "रुपांतर और खुलेपन के 40 वर्षों में चीन में मानवाधिकारों के विकास और प्रगति" शीर्षक श्वेत पत्र जारी किया, जिसमें इतिहास और तथ्यों से बीते चालीस सालों में चीन में मानवाधिकार कार्यों के विकास का सिंहावलोकन किया गया है।

तथाकथित मानवाधिकार 17वीं और 18वीं शताब्दी में यूरोप के पूंजीपति ने सामंत विरोधी संघर्षों में पेश किया था। लेकिन इस विचारधारा का ऐतिहासिक परिसीमन मौजूद है। किसी देश द्वारा मानवाधिकार के झंडे तले दूसरे देशों के अन्दरूनी मामलों में हस्तक्षेप करने की कार्यवाही सही नहीं है।

चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने हाल ही में कहा कि जनता का सुखमय जीवन दिलाना सबसे बड़ा मानवाधिकार है। श्वेत पत्र में कहा गया है कि रुपांतर और खुलेपन के चालीस सालों में चीन में जनता के जीवन अधिकार को प्राथमिकता देने का मानवाधिकार विचार संपन्न हुआ है। चीन के मानवाधिकार के विकास में नवाचार के चलते वास्तविक कार्यवाही भी है। बीते चालीस सालों में चीन ने रुपांतर और खुलेपन में मानवाधिकार का समादर करने, इस की गारंटी करने और इसे आगे बढ़ाने का प्रयास किया और संबंधित सिद्धांत भी चीन के संविधान में निर्धारित किया गया है।

गरीबी उन्मूलन संयुक्त राष्ट्र 2030 अनवरत विकास कार्यक्रम में निर्धारित प्रथम लक्ष्य है और मानवाधिकार का संरक्षण करने का महत्वपूर्ण रास्ता है। बीते चालीस सालों में चीन में कुल 85 करोड़ लोगों को गरीबी से छुटकारा पाया गया है। चीन के ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब जनसंख्या 77 करोड़ से तीन करोड़ तक घटकर पहुंच गयी है। हाल ही में जर्मनी के राष्ट्रपति ने अपनी चीन यात्रा के दौरान कहा कि वे रुपांतर और खुलेपन के चालीस सालों में चीन के द्वारा प्राप्त प्रगतियों की प्रशंसा करते हैं और खासकर कई करोड़ चीनी लोगों को गरीबी से छुटकारा पाने में प्राप्त प्रगतियां अखंडनीय है। विश्व बैंक के डायरेक्टर किम योंग ने कहा कि गरीबी उन्मूलन में चीन को प्राप्त प्रगतियों से दूसरे देशों के विकास में मददगार सिद्ध होगी।

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