सीडीएसी से भारत और चीन के बीच सभ्यता संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान मज़बूत होगा : भारतीय राजदूत

2019-05-06 17:53:00

भारतीय राजदूत विक्रम मिस्री सीआरआई को खास इंटरव्यू देते हुए

चीन में बहुत जल्द ही एशियाई सभ्यताओं के संवाद पर सम्मेलन (सीडीएसी) होने जा रहा है जिसमें एशियाई सभ्यताओं के बीच आपसी सीख और आदान-प्रदान पर जोर दिया जाएगा। चीन स्थित भारतीय राजदूत विक्रम मिस्री के मुताबिक भारत मौजूदा सम्मेलन में भागीदारी के लिए प्रतिनिधिमंडल भेजेगा। हाल में उन्होंने चाइना रेडियो इन्टरनेशनल (सीआरआई) को दिए एक खास इटरव्यू में आशा जतायी कि एशियाई सभ्यताओं के संवाद से भारत और चीन के बीच सभ्यता संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान मज़बूत होगा।

राजदूत विक्रम मिस्री ने कहा कि भारत और चीन दोनों प्राचीन सभ्यताएं हैं और प्राचीन समय में दोनों देशों के बीच एक अच्छा आदान-प्रदान रहा है। यदि एशियाई सभ्यताओं के बीच संवाद होने की बात हो तो बेशक भारत और चीन दोनों शामिल रहेंगे। इस महीने होने वाले संवाद सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधि मंडल भाग लेगा, आशा है कि सम्मेलन के माध्यम से भारत और चीन के बीच सभ्यता संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान मजबूत किया जाएगा। दोनों देशों की जनता के बीच पारस्परिक समझ बढ़ेगी, आपसी गलतफहमी कम होगी और मित्रवत आवाजाही बढ़ेगी। वर्तमान में भारत और चीन के बीच अर्थतंत्र, व्यापार, पर्यटन, मानविकी और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में घनिष्ठ आवाजाही बनी हुई है। यह एशियाई सभ्यताओं के संवाद का सम्मेलन भारत-चीन संबंध की उन्नति के लिए एक अच्छा मौका होगा।

राजदूत विक्रम मिस्री ने इंटरव्यू में यह भी कहा कि साल 2020 भारत और चीन के बीच कूटनीतिक संबंध की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ है। दोनों देश इसे मनाने के लिए रंगारंग कार्यक्रम आयोजित करेंगे। एक साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने मध्य चीन के हूपेई प्रांत की राजधानी वूहान में अनौपचारिक वार्ता की। दोनों नेताओं का मानना है कि भारत और चीन के बीच मानविकी आदान-प्रदान को मजबूत करना जरूरी है, ताकि आपसी समझ और मैत्री को आगे बढ़ाया जा सके। गत वर्ष दिसम्बर में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने दिल्ली में“चीन-भारत उच्च स्तरीय मानविकी आदान-प्रदान व्यवस्था के पहले सम्मेलन”की अध्यक्षता की, जिसमें तय किया गया कि दोनों देश मानविकी आदान-प्रदान और सांस्कृतिक आवाजाही को मज़बूत किया जाएगा। वर्तमान में भारत-चीन संबंध का लगातार मेल-मिलाप बढ़ रहा है, आशा है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ से लाभ उठाकर द्विपक्षीय संबंध को नए मंजिल पर पहुंचाया जाएगा।

(श्याओ थांग)

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