सीडीएसी से विभिन्न सभ्यताओं के प्रति लोगों की समझ बढ़ेगी- भारतीय विद्वान

2019-05-14 17:34:00

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्वी एशियाई अध्ययन केंद्र के प्रधान श्रीकांत कोंडापल्ली

एशियाई सभ्यताओं का संवाद सम्मेलन (सीडीएसी) में भाग लेने वाले भारतीय विद्वान, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्वी एशियाई अध्ययन केंद्र के प्रधान श्रीकांत कोंडापल्ली ने दिल्ली से रवाना होने के पहले चीनी समाचार एजेंसी शिन्ह्वा को दिए एक इन्टरव्यू में कहा कि सीडीएसी का आयोजन सभ्यताओं के बीच मुठभेड़ को दूर करने, आर्थिक सामाजिक समान विकास को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक और महत्वपूर्ण है, जिससे विभिन्न सभ्यताओं के प्रति लोगों की समझ बढ़ेगी और संवाद के माध्यम से वास्तविक लाभ और उभय जीत साकार होगी।

सीडीएसी 15 मई को पेइचिंग में उद्घाटित होगा, जिसका उद्देश्य एशिया और विश्व के विभिन्न देशों की जनता द्वारा रचे गए सभ्यताओं के फल का उत्तराधिकार और विकास करके विभिन्न देशों, विभिन्न सभ्यताओं के बीच आदान-प्रदान और आपसी सीख का संवर्धन है, ताकि मानव जाति की सभ्यता के विकास और प्रगति को आगे बढ़ाया जा सके, मानव जाति के समान भाग्य वाले समुदाय की स्थापना की जा सके।

श्रीकांत ने कहा कि सीडीएसी के आयोजन से सभ्यताओं के बीच संपर्क और घनिष्ठ और मजबूत होगा। अधिकांश एशियाई आर्थिक समुदाय की वृद्धि तेज़ है, इस तरह विभिन्न सभ्यताओं के बीच संवाद करना जरूरी है, ताकि आपस में मतभेद को दूर किया जा सके और एशियाई महाद्वीप का नया भविष्य बनाया जा सके।

श्रीकांत ने कहा कि भारत और चीन की सभ्यता विश्व में प्राचीन और समृद्ध सभ्यताएं हैं। दोनों देशों की सभ्यता के संवाद की मजबूती और आदान-प्रदान पर वे आशाप्रद हैं। उनके विचार में भारत और चीन नियमित रुप से संवाद करना और आवाजाही करना द्विपक्षीय संबंध के विकास का आधार है, द्विपक्षीय संबंध के विकास को दोनों देशों की सभ्यताओं के बीच संपर्क से शक्ति मिलेगी।

“मेरे विचार में भारत और चीन के पास सभ्यता की मजबूत नींव है, अब सभ्यताओं के बीच संवाद और आदान प्रदान करने का समय हो गया है।”श्रीकांत कोंडापल्ली यह बात कही।

(श्याओ थांग)

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