टिप्पणी:सभ्यताओं को बदनाम मत करो

2019-05-14 19:07:00

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के तहत नीति नियोजन अधिकारी किरोन स्किनर ने हाल ही में यह दावा किया कि अमेरिका और चीन के बीच जो घर्षण है, वह अलग अलग सभ्यताओं के बीच मुठभेड़ ही है। उन के बयान ने लोकमत में सनसनी पैदा कर दी है।

स्किनर ने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा विभिन्न सभ्यताओं के बीच मुठभेड़ मानी जाती है। इन के विचार के पीछे हार्वर्ड विश्वविद्यालय के राजनीतिक वैज्ञानिक सैमुअल हंटिंगटन का "सभ्यताओं का टकराव" सिद्धांत ही है। शीत युद्ध की समाप्ति पर प्रोफेसर हंटिंगटन ने अमेरिकी पत्रिका विदेशी मामले पर अपना लेख "सभ्यताओं का टकराव" प्रकाशित किया। सन 1996 में उन्होंने अपनी विचारधारा पर आधारित एक किताब भी प्रकाशित की।

प्रोफेसर हंटिंगटन की विचारधारा विवादास्पद होने के बावजूद उन्होंने विभिन्न सभ्यताओं के बीच टकराव को बढ़ाना नहीं, पर इसे समझाना चाहा। प्रोफेसर हंटिंगटन विभिन्न सभ्यताओं के बीच बातचीत, समझ और सहयोग का समर्थन करते हैं। उधर स्किनर ने कहा कि चीन और अमेरिका के बीच जो विचारधारा का संघर्ष है, वह अभूतपूर्व है। 911 घटना के बाद अमेरिका ने मध्य पूर्व में दो बार युद्ध किया और मुस्लिम के खिलाफ नीतियां कायम कीं। लेकिन अमेरिकी सरकार ने सभ्यताओं का टकराव की बात कभी नहीं की। स्किनर ने यह भी कहा कि अमेरिका के सामने प्रथम बार एक गैर-श्वेत प्रतिद्वंद्विता आया है, जो शीत युद्ध काल में अमेरिका-सोवियत संघ प्रतिस्पर्धा से बिल्कुल अलग है। इस का मतलब यही है कि अमेरिका और सोवियत संघ के बीच जो प्रतिस्पर्धा थी, वह श्वेतों के बीच की होती थी। पर अमेरिका और चीन के बीच जो प्रतिस्पर्धा है, वह श्वेत और गैर-श्वेत के बीच संघर्ष है। ऐसे बयान से राजनीतिक अभिजात वर्गों को परेशानी पैदा हुई। उन्हों ने स्किनर के जातिवादी विश्लेषण से अपने को दूर रखा। क्योंकि नस्लीय भेदभाव से संबंधित विचारों के प्रति अमेरिका में सख्त मनाही है।

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